शेखपुरा जिले से जुड़े नाबालिग अपहरण और देह व्यापार के सनसनीखेज मामले में आखिरकार इंसाफ की एक और कड़ी जुड़ गई। 16 वर्षीय किशोरी के अपहरण और उसे मुजफ्फरपुर के कुख्यात चतुर्भुज स्थान स्थित चकला घर में बेचने के मामले में दो साल से फरार चल रही चकला संचालिका आसमा खातून ने शनिवार को शेखपुरा कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजते हुए शेखपुरा जेल भेज दिया।
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यह मामला करंडे थाना क्षेत्र के धारी गांव से जुड़ा है, जहां से किशोरी का अपहरण कर उसे देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया गया था। इस केस में कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस के मुताबिक, इस जघन्य अपराध में शामिल तीन आरोपियों को पहले ही कोर्ट आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है।
एक माह पहले पीड़िता के अपहरण में शामिल विकास कुमार और विजय कुमार को उम्रकैद मिली थी, जबकि किशोरी के खरीददार मुजफ्फरपुर निवासी मो. आजाद को पांच माह पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। मो. आजाद, आत्मसमर्पण करने वाली आसमा खातून का दामाद है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलती नजर आ रही हैं।
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पुलिस के लगातार दबाव और कोर्ट द्वारा कुर्की-जब्ती का इस्तेहार चिपकाए जाने के बाद आसमा खातून पर शिकंजा कसता चला गया। आखिरकार, गिरफ्तारी से पहले उसने खुद कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया।
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हालांकि, इस केस का एक आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से बाहर है। बेतिया निवासी सपाटू मियां अब भी फरार है, जिसके खिलाफ कोर्ट ने कुर्की का वारंट जारी कर रखा है। पुलिस का कहना है कि उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
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यह मामला न सिर्फ मानव तस्करी की भयावह सच्चाई को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून की पकड़ देर से ही सही, लेकिन मजबूत जरूर होती है।