शेखपुरा सिविल कोर्ट ने इस बार सख्त संदेश दिया है—कानून के सामने पद और रुतबा कोई मायने नहीं रखता। वर्ष 2002 के एक मारपीट मामले में गवाही देने से लगातार बच रहे तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) श्याम किशोर प्रसाद और कार्यपालक पदाधिकारी नरेंद्र झा के खिलाफ अदालत ने गैर-जमानतीय गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार तिवारी ने दोनों अधिकारियों की बार-बार अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोक अभियोजक उदय नारायण सिंहा के अनुसार, दोनों अधिकारी इस मामले में अहम गवाह हैं, लेकिन कई बार समन और जमानतीय वारंट जारी होने के बावजूद वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। इसी वजह से मामला पिछले दो दशकों से अदालत में लटका हुआ है।
कोर्ट ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई पर दोनों अधिकारियों को हर हाल में उपस्थित होकर गवाही दर्ज करानी होगी। यदि इसके बावजूद वे पेश नहीं होते हैं, तो पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया जाएगा कि उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत किया जाए।
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अदालत के इस फैसले को न्यायिक सख्ती और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि गवाहों की अनुपस्थिति से न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि पीड़ित पक्ष को भी वर्षों तक न्याय के इंतजार में रखा जाता है। कोर्ट के इस कदम के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।