सहरसा: बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर में बुधवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सरकारी आयोजनों में स्कूली बच्चों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुरा पंचायत सरकार भवन परिसर में आयोजित मंत्रियों के स्वागत समारोह में स्कूली छात्र-छात्राओं को कथित तौर पर स्कूल समय में बुलाया गया और तेज धूप में घंटों खड़ा रखा गया।
सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कार्यक्रम के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मोहन कुमार सिंह भी मौके पर मौजूद थे। इसके बावजूद बच्चों के लंबे समय तक धूप में रहने का सिलसिला जारी रहा।
हाथों में स्वागत की थाली, सिर पर चिलचिलाती धूप
जानकारी के अनुसार, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और मंत्री रत्नेश सादा के आगमन को लेकर रायपुरा पंचायत सरकार भवन परिसर में स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में स्थानीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और मध्य विद्यालय रायपुरा भौरहा के छात्र-छात्राओं को भी बुलाया गया।
स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे हाथों में फूलों की थाली लेकर मंत्रियों के स्वागत के लिए मैदान में मौजूद रहे। आरोप है कि बच्चों को तेज धूप में काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। लंबे इंतजार के कारण कई बच्चे पसीने और गर्मी से परेशान नजर आए।
स्वागत खत्म हुआ, लेकिन बच्चों की ‘ड्यूटी’ नहीं
मंत्रियों का काफिला पहुंचने के बाद बच्चों से स्वागत कराया गया। इसके बाद भी उन्हें तत्काल स्कूल वापस भेजने के बजाय कार्यक्रम में मौजूद रहने दिया गया। आरोप है कि स्वागत कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आयोजित सभा के दौरान भी छात्र-छात्राओं को भीड़ के बीच बैठाए रखा गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल ड्रेस में मौजूद बच्चों को गर्मी, भूख-प्यास और थकान के बीच लंबे समय तक कार्यक्रम में बैठाए रखना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
मौके पर मौजूद थे बीईओ, फिर भी नहीं रुका मामला
इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्यक्रम में बीडीओ सह बीईओ मोहन कुमार सिंह की मौजूदगी के बावजूद बच्चों को स्कूल समय में कार्यक्रम में रखने का आरोप है।
जब अधिकारी से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने इस तरह बच्चों को कार्यक्रम में रखने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल- जब सामने सबकुछ था तो रोक क्यों नहीं लगाया गया?
अधिकारी के जांच के बयान के बाद स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बच्चों को स्कूल ऑवर में इस तरह के कार्यक्रम में रखना गलत था, तो मौके पर मौजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी ने उसी समय इसे क्यों नहीं रोका?
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जिस अधिकारी की मौजूदगी में पूरा कार्यक्रम हुआ, उसी अधिकारी के स्तर से अब मामले की जांच कराए जाने की बात कितनी प्रभावी होगी।
बच्चों के अधिकार और शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मामले ने सरकारी और राजनीतिक आयोजनों में स्कूली बच्चों की भागीदारी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को शिक्षा के समय स्कूल से बाहर बुलाकर घंटों धूप में खड़ा रखने के आरोप ने अभिभावकों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि बच्चों को किसके निर्देश पर कार्यक्रम में बुलाया गया था। साथ ही यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में उन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है, जिनकी मौजूदगी में स्कूली बच्चे कथित तौर पर घंटों धूप में खड़े रहने को मजबूर हुए।
ये ख्ग्बर भी पढ़े: Bihar: 12 दिन से लापता सूरज मोदी, पत्नी की एसपी से भावुक गुहार- जिंदा हो या मुर्दा, मेरे पति को खोजिए!