मोतिहारी: बिहार की धरती पर शनिवार को आस्था, इतिहास और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब मोतिहारी के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में विश्व के सबसे बड़े सहस्त्रालिंगम शिवलिंग की विधिवत स्थापना की गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा और चंपारण शिवमय हो गया।

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में एक ही ग्रेनाइट पत्थर से तैयार किया गया यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा, 33 फीट लंबा और करीब 210 टन वजनी है। वर्षों की शिल्पकारी और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के बाद इसे आकार दिया गया। स्थापना समारोह के दौरान वाराणसी और अयोध्या से आए विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कराई। कार्यक्रम को और अलौकिक बनाने के लिए हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

Bihar News : नितिन नबीन के भोज में दिखे दो कुशवाहा विधायक, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी!
इस भव्य आयोजन के साक्षी बनने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित कई मंत्री, सांसद, साधु-संत और धर्माचार्य मंदिर परिसर पहुंचे। शिवलिंग स्थापना के दौरान हजारों श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचे, जिससे पूरे इलाके में मेले जैसा माहौल बन गया। फूल, बेलपत्र, धतूरा और पूजा सामग्री की दुकानों से मंदिर परिसर गुलजार रहा।

Bihar News : दही-चूड़ा की थाली से टूटी दूरी, 8 महीने बाद लालू परिवार में लौटे तेजप्रताप!
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ कृष्ण चतुर्दशी का दिन शिवलिंग स्थापना के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसी कारण इस शुभ तिथि को शिवलिंग की स्थापना की गई। कहा जाता है कि यही वह मार्ग है जिससे भगवान श्रीराम जनकपुर से अयोध्या लौटे थे और उसी पावन भूमि पर अब महादेव का विराट स्वरूप विराजमान हुआ है।

विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के साथ मोतिहारी ने धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान बना ली है। श्रद्धालुओं के साथ-साथ अब देश-विदेश के पर्यटकों के यहां आने की संभावना बढ़ गई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी साबित हुआ।