लखीसराय: कभी इसी शहर की गलियों से निकलकर बड़े सपने देखने वाले मनोज अग्रवाल जब लखीसराय लौटे, तो यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि “सम्मान की वापसी” जैसा पल बन गया। वेद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के मुख्यालय में उनका स्वागत किसी औपचारिक कार्यक्रम से ज्यादा एक भावनात्मक जुड़ाव की तरह नजर आया।
पटेल नगर स्थित वेद ग्रुप कैंपस में जैसे ही मनोज अग्रवाल पहुंचे, माहौल में अपनापन और गर्व साफ झलकने लगा। यह वही लखीसराय है, जहां से उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई की और आज उसी शहर में उन्हें समाजसेवा और जनहित के कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
वेद ग्रुप के चेयरमैन डॉ. ओम प्रकाश ने उन्हें अंगवस्त्र, माँ जगदंबा का प्रतीक चिन्ह और स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। लेकिन इस सम्मान की खास बात सिर्फ ये नहीं थी, बल्कि वह बातचीत थी, जिसमें शिक्षा, युवाओं के भविष्य और देश के विकास की दिशा पर खुलकर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए मनोज अग्रवाल सिर्फ एक अतिथि नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बनकर सामने आए। उनका सफर यह बताता है कि छोटे शहरों से निकलकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं और फिर उसी समाज को कुछ लौटाया भी जा सकता है।
उनकी सहजता और अनुभवों ने वहां मौजूद युवाओं और शिक्षकों को खास तौर पर प्रभावित किया। बातचीत के दौरान उन्होंने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
यह आयोजन सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि एक संदेश भी था—“जुड़ाव कभी खत्म नहीं होता।” लखीसराय ने अपने एक बेटे को सम्मान देकर यह साबित कर दिया कि जो लोग अपनी मिट्टी से जुड़े रहते हैं, उनकी पहचान और भी खास हो जाती है।
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