नई दिल्ली: 6 अक्टूबर 2026 को राजधानी नई दिल्ली में सियासी तापमान अपने चरम पर रहा। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे INDIA गठबंधन के नेताओं ने संसद से चुनाव आयोग (ECI) मुख्यालय तक ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च‘ निकाला। दिनभर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा आकाशवाणी भवन परिसर में बरगद के पेड़ के नीचे 8 घंटे से अधिक समय तक धरने पर डटे रहे। रात 8 बजे दिल्ली पुलिस ने राहुल, प्रियंका और अन्य नेताओं को जबरन बसों में बैठाकर हिरासत में लिया और किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन ले गई। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत और कानूनी औपचारिकता के बाद रात 10:10 बजे सभी नेताओं को रिहा किया गया।
सुबह 11 बजे संसद के मकर द्वार से 19 विपक्षी दलों के 200 से अधिक सांसदों ने लोकतंत्र बचाओ के बैनर और तख्तियों के साथ मार्च की शुरुआत की थी। राहुल गांधी युवा मतदाताओं (Gen-Z) से जुड़ने के उद्देश्य से ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ का पोस्टर लेकर पहुँचे थे। जैसे ही मार्च नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के पास पहुँचा, वहाँ पहले से तैनात भारी पुलिस बल और मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग लगाकर सांसदों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इसके बाद कई सांसद बैरिकेड्स पर चढ़कर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ उग्र नारेबाजी करने लगे।
मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य सांसदों के साथ आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश कर गए और परिसर में मौजूद बरगद के पेड़ के नीचे चटाई बिछाकर धरने पर बैठ गए। राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलकर ज्ञापन सौंपने पर अड़े थे। वहीं दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने औपचारिक रूप से मिलने का समय नहीं मांगा था। आयोग के अनुसार, संसद एनेक्सी में 240 सांसदों के साथ बैठक का प्रस्ताव था जो कि काफी असामान्य था और मौके पर किसी वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन देने का प्रस्ताव सांसदों ने स्वीकार नहीं किया।
धरने के दौरान आकाशवाणी परिसर में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब एक पुलिस अधिकारी तिरंगा लिए कार्यकर्ता के पास पहुँचा, तो राहुल गांधी ने तुरंत आगे बढ़कर कहा कि इसे मत छूना और प्रियंका गांधी भी राष्ट्रीय ध्वज के सामने सुरक्षात्मक मुद्रा में खड़ी हो गईं। दिनभर चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद रात 8 बजे दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने परिसर को खाली कराने के लिए कार्रवाई शुरू की। भारी धक्का-मुक्की और रस्साकशी के बीच राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और अमरिंदर सिंह राजा वडिंग सहित लगभग 250 से अधिक प्रदर्शनकारियों को पुलिस वैन और बसों में लादकर किंग्सवे कैंप ले जाया गया। रात 10:10 बजे रिहा होने के बाद राहुल गांधी ने अपनी गाड़ी की खिड़की से मीडिया को संविधान की प्रति दिखाकर संदेश दिया।
इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी बयानबाजी भी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी ने लिखा कि लोकतंत्र के गद्दारों को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है और इसका पूरा हिसाब होगा तथा एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा। धरने के दौरान उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार ने मिलकर देश के लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को हाइजैक कर लिया है। इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी ने एक ही दिन में 4 प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विपक्ष के इस प्रदर्शन को देश में अराजकता फैलाने और राहुल गांधी को री-लॉन्च करने की कोशिश करार दिया। भाजपा प्रवक्ताओं ने राहुल गांधी को ‘कामचोर’ बताते हुए कहा कि दूसरों को ‘वोट चोर’ कहने के बजाय उन्हें खुद जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस का कहना था कि प्रदर्शनकारियों ने मार्च की कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी और लुटियंस दिल्ली में ट्रैफिक बाधित होने के कारण BNS की धारा 163 के तहत यह कार्रवाई की गई।
विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग के सामने 5 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को रद्द करना और पूर्व की वोटर लिस्ट बहाल करना शामिल है। इसके अलावा विपक्ष ने मांग की है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया को बूथ स्तर पर सार्वजनिक किया जाए, भविष्य के चुनावों में EVM के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल हो और सभी संवैधानिक संस्थाएं अपनी निष्पक्षता व जवाबदेही सुनिश्चित करें।
इस बड़े राजनीतिक विवाद की वजह चुनाव आयोग के भीतर से आई वे खबरें हैं जिनमें SIR प्रक्रिया और एकतरफा फैसलों को लेकर साथी चुनाव आयुक्तों द्वारा जताई गई आपत्तियों का दावा किया गया था। विपक्ष का आरोप है कि SIR के माध्यम से देश भर में करीब 13.4 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर पिछले 5 दिनों के भीतर दिल्ली और मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का यह 7वां बड़ा प्रदर्शन था, जिसने देश के सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।
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