पटना: हार्डकोर नक्सली दयानंद मालाकार के एनकाउंटर को लेकर बिहार विधान परिषद में गुरुवार को जोरदार बहस हुई। राजद एमएलसी शशि यादव ने सदन में इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी की जांच टीम की पड़ताल में यह सामने आया है कि दयानंद को पकड़कर हत्या की गई, न कि मुठभेड़ में मारा गया। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी है तो उसे न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए था।
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वहीं बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दयानंद मालाकार एक हार्डकोर नक्सली था और एसटीएफ व बिहार पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। उन्होंने बताया कि उसके खिलाफ 21 आपराधिक मामले दर्ज थे और सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी।
31 दिसंबर 2025 को हुआ था एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार 31 दिसंबर 2025 को प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के उत्तर बिहार एरिया कमेटी सचिव दयानंद मालाकार उर्फ सनेश पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में मारा गया था। सूचना मिलने के बाद एसटीएफ की एआरजी, एसओजी, डीआईयू टीम, बेगूसराय पुलिस के चीता बल और तेघड़ा थाना पुलिस ने नोनपुर गांव में घेराबंदी की थी।
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पुलिस का दावा है कि आत्मसमर्पण की चेतावनी के बावजूद नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दयानंद मारा गया। मौके से इंसास राइफल, कार्बाइन, पिस्तौल और बड़ी मात्रा में गोलियां बरामद की गईं।
21 मामलों में था नाम
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दयानंद पर तेघड़ा, छौड़ाही, बरौनी, वीरपुर, खगड़िया और मुजफ्फरपुर सहित विभिन्न थानों में कुल 21 मामले दर्ज थे। वह लेवी वसूली, रंगदारी, हत्या और विस्फोटक अधिनियम से जुड़े मामलों में वांछित था। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।
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गांव वालों ने भी उठाए सवाल
एनकाउंटर के बाद परिजनों और कुछ ग्रामीणों ने भी मुठभेड़ को फर्जी बताया था। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून के तहत की गई और मुठभेड़ के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
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अब यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष जहां न्यायिक जांच की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इसे नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है।