वैशाली/पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई के बीच वैशाली जिले से एक मामला सामने आया है। पटेढ़ी बेलसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. कामिनी प्रसाद और डेटा एंट्री ऑपरेटर हिमांशु कुमार को एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के लंबित भुगतान के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामले में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद पटना स्थित डॉक्टर के आवास पर तलाशी ली गई, जहां नकदी, बैंक जमा और आभूषण समेत कई संपत्तियों से जुड़े विवरण मिलने की बात सामने आई है।
कौन हैं डॉ. कामिनी प्रसाद?
डॉ. कामिनी प्रसाद वैशाली जिले के पटेढ़ी बेलसर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात थीं। निगरानी जांच ब्यूरो की कार्रवाई में उनका नाम एक कथित रिश्वतखोरी मामले में सामने आया है। इस मामले में उनके साथ पीएचसी के डेटा एंट्री ऑपरेटर हिमांशु कुमार को भी गिरफ्तार किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायत एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी जयपाल सिंह ने दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके लंबित प्रोत्साहन भुगतान, मोबाइल रिचार्ज और परिवहन भत्ते की राशि जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी।
1.29 लाख रुपये के भुगतान के बदले 8,600 रुपये मांगने का आरोप
शिकायत के अनुसार, संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी की करीब 1,29,800 रुपये की राशि लंबित थी। आरोप लगाया गया कि भुगतान जारी करने के बदले 8,600 रुपये मांगे गए।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी जांच ब्यूरो ने मामले का सत्यापन किया। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक बसुदेव राय के नेतृत्व में ट्रैप टीम ने कार्रवाई की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट में गिरफ्तारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने की कार्रवाई बताया गया है।
हालांकि, आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
पटना स्थित आवास पर तलाशी, क्या-क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. कामिनी प्रसाद के पटना के कंकड़बाग स्थित आवास पर तलाशी के दौरान कई तरह की संपत्तियों से जुड़े विवरण सामने आए। इनमें शामिल हैं:
- 15 लाख रुपये नकद मिलने की बात कही गई है।
- 99 लाख रुपये की बैंक जमा राशि का उल्लेख किया गया है।
- सोने-चांदी के आभूषण मिलने की जानकारी दी गई है।
- बीमा पॉलिसियों से संबंधित दस्तावेज भी तलाशी में सामने आने की बात कही गई है।
इन आंकड़ों ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। हालांकि, नकदी, बैंक जमा, आभूषण या बीमा पॉलिसी का मिलना अपने आप में अवैध संपत्ति का प्रमाण नहीं है। संपत्ति के स्रोत और वैधता को लेकर जांच एजेंसी की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
निगरानी विभाग की कार्रवाई से फिर चर्चा में भ्रष्टाचार
बिहार में सरकारी कार्यालयों में रिश्वत मांगने की शिकायतों पर निगरानी विभाग समय-समय पर ट्रैप कार्रवाई करता रहा है। इस मामले में भी शिकायत के सत्यापन के बाद कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
निगरानी जांच ब्यूरो के महानिदेशक जेएस गंगवार के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि मामला 8 अक्टूबर को दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को विशेष सतर्कता अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया बताई गई है। मामले की आगे की जांच जारी है।
2026 में निगरानी ब्यूरो के आंकड़े भी चर्चा में
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो के सामने यह भ्रष्टाचार से जुड़ा 119वां मामला बताया गया है। इनमें 109 ट्रैप केस दर्ज होने, 110 आरोपियों की गिरफ्तारी और कथित रिश्वत के रूप में 38,17,400 रुपये बरामद किए जाने का उल्लेख है।
ये आंकड़े रिपोर्ट में दिए गए हैं; इनके आधिकारिक सत्यापन के लिए निगरानी ब्यूरो की मूल जानकारी देखना जरूरी है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
इस मामले में आगे की जांच के दौरान कथित रिश्वत की मांग, लंबित भुगतान की प्रक्रिया, बरामद नकदी और अन्य संपत्तियों के स्रोत जैसे बिंदु महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच एजेंसी यह भी देख सकती है कि संबंधित संपत्तियां ज्ञात आय के स्रोतों से मेल खाती हैं या नहीं।
फिलहाल, डॉ. कामिनी प्रसाद और हिमांशु कुमार के खिलाफ मामला आरोपों और जांच के चरण में है। अंतिम निर्णय अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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