पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र का 12वां दिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बयानबाजी के बीच गरमाया रहा। शराबबंदी, आरक्षण और विपक्ष के हंगामे के मुद्दों ने सदन का माहौल पूरी तरह सियासी रंग में रंग दिया। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन के बयान ने सबसे ज्यादा हलचल मचा दी, जब उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह फेल है और “विधानसभा में भी शराब की डिलीवरी हो सकती है।” इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
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सदन के बाहर जदयू विधायक विनय चौधरी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे “डोलते-डोलते” सदन में आए थे और उनकी मेडिकल जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता पहले ही राजद का “इलाज” कर चुकी है।
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इधर, आरक्षण की सीमा 85% करने की मांग को लेकर राजद विधायकों ने कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंचकर विरोध किया और अंततः वॉकआउट कर दिया।
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शराबबंदी का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। RLM विधायक माधव आनंद और AIMIM नेता अख्तरुल ईमान ने कानून की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि इससे अवैध कारोबार बढ़ा है। वहीं सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी।
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सत्र के दौरान कई अन्य मुद्दे भी चर्चा में रहे, जिनमें ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को टेंडर मिलने का आरोप, बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह को भारत रत्न देने की मांग और प्रवासी मजदूरों के मुद्दे शामिल रहे। पूरे दिन सदन में राजनीतिक गर्माहट और बयानबाजी का माहौल बना रहा।