पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों मुद्दों से ज्यादा भाषा चर्चा में है। विधानसभा के भीतर शुरू हुआ ‘हाथी’ वाला तंज, सोशल मीडिया पर ‘बंदर’ वाले पलटवार में बदल गया। और देखते ही देखते सियासी तापमान बढ़ गया।
डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में बिना नाम लिए तंज कसते हुए कहा कि “अब तो पुलिस के डर से हाथी भी बीमार होकर अस्पताल जाना चाहता है।” बयान को विपक्षी सांसद की हालिया टिप्पणी से जोड़कर देखा गया।
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इस पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखा जवाब दिया— “नाबालिग था, अब बंदर बन गया है। इस बंदर के हाथ में बिहार है…”। पोस्ट के बाद सियासत में बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया।
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बीजेपी ने इसे भाषाई मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए पप्पू यादव से सार्वजनिक माफी की मांग की। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि राजनीति में असहमति हो सकती है, लेकिन इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है।
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वहीं आरजेडी और कांग्रेस ने दोनों नेताओं को गलत ठहराया। आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि हाल के दिनों में राजनीतिक भाषा का स्तर गिरा है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस प्रवक्ता आसित नाथ तिवारी ने भी बड़े पदों पर बैठे नेताओं को मर्यादा का ध्यान रखने की नसीहत दी।
अब सवाल यह है कि क्या यह ‘हाथी बनाम बंदर’ की जंग यहीं थमेगी, या आने वाले दिनों में और सियासी तीर चलेंगे? फिलहाल बिहार की राजनीति में शब्द ही सबसे बड़ा हथियार बने हुए हैं।