सहरसा के उच्च विद्यालय सहसौल के शिक्षक आनंद कुमार झा शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। उनका मानना है, “कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो!”। इस दर्शन के साथ वे बच्चों को व्याकरण, भाषा और साहित्य में दक्ष बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
श्री झा ने जिला और प्रमंडल स्तर पर हिंदी की कई गतिविधियों का आयोजन कर बच्चों को साहित्य की ओर आकर्षित किया है। कई वर्षों से वे बिहार का पहला और सबसे बड़ा बाल कवि सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं, जिसमें सरकारी विद्यालयों के बच्चों को अपने स्वरचित कविता प्रस्तुत करने का मंच मिलता है। इस माध्यम से कई बच्चे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं।
उनका मानना है कि छोटी उम्र में बच्चों को सही उच्चारण, व्याकरण और लेखन कला से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए वे जिलास्तरीय निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन करते रहते हैं। बच्चों के व्याकरणिक दोषों पर काम कर उन्हें लेखन में दक्ष बनाने का प्रयास लगातार जारी है।
आनंद झा ऑनलाइन हिंदी कक्षाओं के माध्यम से भी बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं और हिंदी की ई-पत्रिका ‘नवांकुर’ का वार्षिक प्रकाशन कर उन्हें साहित्य का स्थायी मंच प्रदान करते हैं। उनका संपादित कार्य ‘प्रार्थना गीत’ भी प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने हिंदी क्लब का निर्माण कर बच्चों में हिंदी और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाई है।
श्री झा को उनके साहित्यिक और शैक्षणिक योगदान के लिए राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उन्हें कर्णप्रिय उद्घोषक के रूप में भी सम्मानित किया गया। उनका प्रयास बच्चों को भाषा, साहित्य और संस्कृति में दक्ष बनाने और उनकी प्रतिभा को निखारने में निरंतर जारी है।
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सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट…