लखीसराय: नीट परीक्षा में कदाचार के मामलों के बाद पूरे देश में परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच लखीसराय जिला प्रशासन सिपाही भर्ती परीक्षा को कदाचारमुक्त बनाने के लिए सख्त तैयारी का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत और प्रशासनिक माहौल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जिले का पुराना रिकॉर्ड भी इस बहस को और गर्म कर रहा है, जब लखीसराय में परीक्षा के दौरान करीब 9 सॉल्वर सहित 31 लोग पकड़े गए थे। इसी पृष्ठभूमि में अब प्रशासन ने 11 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और “जीरो टॉलरेंस” व्यवस्था लागू करने की बात कही है।
जिला पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन का दावा है कि इस बार सीसीटीवी, जैमर और बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा।
हालांकि, बैठक से जुड़ी तस्वीरों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। तस्वीर में जिला पदाधिकारी सभी अधिकारियों को संबोधित करते नजर आ रहे हैं, जबकि कई अधिकारी आपस में बातचीत और अनौपचारिक चर्चा में मशगूल दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य कुछ लोगों को उस तरह दिखाई दे रहा है जैसे “कुंभ मेले में बिछड़ा हुआ भाई मिल गया हो”—जहां अनुशासन की जगह अनौपचारिकता हावी नजर आती है।
इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब बैठक स्तर पर ही गंभीरता और अनुशासन पर बहस दिख रही है, तो क्या परीक्षा जैसे संवेदनशील आयोजन में पूरी सख्ती और पारदर्शिता सुनिश्चित हो पाएगी?
दूसरी ओर, प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि 5,105 अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। सभी केंद्रों पर सुबह 10 बजे से रिपोर्टिंग और 11 बजे के बाद प्रवेश पर पूर्ण रोक रहेगी।
पुलिस अधीक्षक ने भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा से पहले सभी केंद्रों की गहन जांच होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या लखीसराय प्रशासन अपने दावों को जमीन पर उतार पाएगा, या फिर पुरानी घटनाओं की छाया एक बार फिर व्यवस्था पर भारी पड़ेगी।
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