शेखपुरा: जिस थाने का नाम सुनकर लोग अब तक दूरी बना लेते थे, उसी कोसुम्भा थाना परिसर में शुक्रवार को माहौल बदला-बदला नजर आया। वर्दी की सख्ती की जगह संवाद की नरमी दिखी और फरियादियों की भीड़ के बीच खुद कुर्सी संभालकर बैठे थे शेखपुरा के पुलिस कप्तान बलिराम कुमार चौधरी।
यह कोई औपचारिक मीटिंग नहीं, बल्कि असली पुलिस-पब्लिक जनसंवाद था, जहां लोग बिना डर, बिना बिचौलिये सीधे एसपी से बोले। कोई जमीन विवाद लेकर पहुंचा, कोई पारिवारिक झगड़े की शिकायत लेकर तो किसी ने कानून की जानकारी मांगी।
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जनता बोली, कप्तान ने सुना – वहीं दिए गए निर्देश
जनता दरबार के दौरान नाबालिग बच्ची के अपहरण की शिकायत सामने आते ही एसपी का रुख सख्त हो गया। थाना अध्यक्ष को मौके पर ही स्पष्ट आदेश मिला— “लापरवाही नहीं, तुरंत कार्रवाई चाहिए।” एसपी ने यह भी साफ किया कि बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों में कोई ढिलाई नहीं चलेगी।
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अब शिकायत थाने नहीं, मोबाइल से भी
जनता को यह भी बताया गया कि अब पुलिस तक पहुंचने के लिए हर बार थाने की देहरी घिसने की जरूरत नहीं। ऑनलाइन एफआईआर और डिजिटल शिकायत प्रणाली से लोग घर बैठे अपनी बात पुलिस तक पहुंचा सकते हैं।
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डर की जगह भरोसा, यही मकसद
एसपी बलिराम चौधरी ने कहा कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता की साथी है। जब पुलिस और जनता साथ चलेंगी, तभी अपराध पर लगाम लगेगी।
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जनता दरबार बना भरोसे का मंच
कार्यक्रम के बाद स्थानीय लोगों ने माना कि ऐसे दरबार से पुलिस का डर नहीं, भरोसा बढ़ता है। लोगों को यह अहसास हुआ कि उनकी आवाज सीधे जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी तक पहुंच रही है।
कोसुम्भा थाना में हुआ यह जनता दरबार एक संदेश छोड़ गया—अब शिकायतें फाइलों में नहीं, सीधे फैसलों तक पहुंचेंगी।