कटिहार: बिहार के कटिहार जिले में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस लाइन जैसे संवेदनशील परिसर में एक व्यक्ति कथित तौर पर 15 दिनों से अधिक समय तक फर्जी पुलिसकर्मी बनकर रहता रहा, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। आरोपी की पहचान दीपक कुमार के रूप में हुई है। आरोप है कि वह खुद को सैप (SAP) जवानों की गाड़ी का ड्राइवर बताकर पुलिस लाइन में रह रहा था। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस परिसर में पुलिसकर्मियों की आवाजाही और विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां होती हैं, वहां एक बाहरी व्यक्ति कथित फर्जी पहचान के सहारे इतने दिनों तक कैसे ठहरा रहा? उसकी पहचान की पुष्टि किस स्तर पर की गई और उसे पुलिस लाइन में रहने की अनुमति कैसे मिली? ये सवाल अब सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
खुद को SAP जवानों की गाड़ी का ड्राइवर बताकर रहा परिसर में
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दीपक कुमार ने पुलिस लाइन में अपनी पहचान सैप जवानों की गाड़ी के ड्राइवर के रूप में बताई थी। इसी दावे के आधार पर वह 15 दिनों से अधिक समय तक पुलिस लाइन में रहा। इस दौरान उसकी वास्तविक पहचान सामने नहीं आ सकी।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उसने किसके माध्यम से पुलिस लाइन में प्रवेश किया था। क्या किसी व्यक्ति ने उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा कर लिया था या फिर परिसर में प्रवेश और ठहरने की प्रक्रिया में कोई बड़ी चूक हुई थी? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस लाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
पुलिस लाइन को सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थान माना जाता है। यहां पुलिसकर्मियों की आवाजाही के साथ-साथ विभागीय गतिविधियां भी संचालित होती हैं। ऐसे परिसर में किसी व्यक्ति का फर्जी पहचान के आधार पर लंबे समय तक रहना सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस लाइन में आने-जाने वाले लोगों का रिकॉर्ड किस तरह रखा जाता है और बाहरी व्यक्तियों की पहचान की जांच के लिए क्या व्यवस्था लागू है। यदि आरोपी वास्तव में फर्जी पहचान के सहारे वहां रह रहा था, तो इतने दिनों तक उसकी गतिविधियों पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी?
किसके संपर्क से पहुंचा था दीपक, क्या थी असली मंशा?
फिलहाल पुलिस आरोपी दीपक कुमार से जुड़े पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह पुलिस लाइन में किसके संपर्क से पहुंचा था, वहां किन लोगों से उसकी बातचीत होती थी और इतने दिनों तक रहने के पीछे उसकी वास्तविक मंशा क्या थी।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने अपनी पहचान से संबंधित कोई दस्तावेज या अन्य प्रमाण प्रस्तुत किया था या नहीं। उसके पुलिस लाइन में रहने के दौरान की गतिविधियां भी जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं।
गिरफ्तारी के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी
दीपक कुमार की गिरफ्तारी के बाद यह मामला केवल एक व्यक्ति की कथित फर्जी पहचान तक सीमित नहीं रह गया है। इसने पुलिस लाइन जैसे संवेदनशील परिसर में प्रवेश और ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में केवल पहचान संबंधी लापरवाही हुई या सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ी चूक सामने आती है।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दीपक कुमार पुलिस लाइन में कैसे पहुंचा, उसे वहां रहने में किसका सहयोग मिला और इस पूरे मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
ये खबर भी पढ़े: अरियरी में नशे के खिलाफ महिलाओं की हुंकार, 150 से अधिक जीविका दीदियों ने ली नशामुक्त बिहार की शपथ!