पटना: बिहार विधान परिषद के सभापति और भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य की सियासत में अहम पदों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके पद छोड़ने के बाद अब सभापति की कुर्सी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पद के लिए विधान परिषद के वर्तमान उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
अवधेश नारायण सिंह ने विधान परिषद के सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा है। इस घटनाक्रम को भाजपा और जेडीयू के बीच सत्ता संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सभापति पद के अगले दावेदार को लेकर अंतिम फैसला औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष भाजपा के पास, अब परिषद की बारी?
बिहार में सत्ता के प्रमुख पदों के बंटवारे को लेकर भाजपा और जेडीयू के बीच नए समीकरण की चर्चा है। मुख्यमंत्री पद और बिहार विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू को मिलने की संभावना को गठबंधन के भीतर जिम्मेदारियों के संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस व्यवस्था के जरिए NDA के दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के बीच संवैधानिक पदों का संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, पदों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों की ओर से किसी औपचारिक समझौते का विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
रामवचन राय के नाम की चर्चा तेज
सभापति पद के संभावित दावेदारों में जेडीयू के वरिष्ठ नेता और वर्तमान उपसभापति प्रो. डॉ. रामवचन राय का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वे जुलाई 2024 में बिहार विधान परिषद के उपसभापति निर्विरोध चुने गए थे।
रामवचन राय को सदन की कार्यवाही और संसदीय प्रक्रियाओं का अनुभव है। इसी वजह से सभापति पद में बदलाव की चर्चा के बीच उनकी दावेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उनके नाम पर अंतिम मुहर लगने को लेकर अभी औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
JDU की मांग और गठबंधन के भीतर पदों का संतुलन
विधान परिषद के सभापति पद को लेकर जेडीयू की दावेदारी की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही थी। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के भीतर इस पद को लेकर मांग उठी थी। अब अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है।
इस घटनाक्रम को केवल एक पद में बदलाव के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन के भीतर राजनीतिक जिम्मेदारियों के बंटवारे के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस्तीफे के पीछे की वजह और दोनों दलों के बीच हुई बातचीत के आधिकारिक विवरण की पुष्टि जरूरी है।
विधान परिषद में किस दल के कितने सदस्य?
बिहार विधान परिषद में कुल 75 सदस्य हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के 26 और जेडीयू के 20 सदस्य हैं, जबकि राजद के 15 सदस्य हैं। शेष सीटों पर कांग्रेस, अन्य दलों और निर्दलीय सदस्यों का प्रतिनिधित्व है।
सभापति पद का बदलाव परिषद के भीतर सत्ता पक्ष की भूमिका और गठबंधन के राजनीतिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब नए सभापति के नाम पर नजर
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार विधान परिषद की कमान किसे सौंपी जाएगी। जेडीयू के खाते में सभापति पद जाने और रामवचन राय के नाम की चर्चा के बीच औपचारिक निर्णय का इंतजार है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सभापति पद में बदलाव ने NDA के भीतर सत्ता संतुलन और महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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