भारत/नेपाल: विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल के पहाड़ी इलाकों में तबाही की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। त्रिशूली बाजार और आसपास के इलाके मलबे में तब्दील नजर आ रहे हैं। जहां कुछ दिन पहले तक घरों, दुकानों और सड़कों पर लोगों की आवाजाही थी, वहां अब बाढ़ के बाद बची तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं।
सड़क किनारे बिखरा सामान, मलबे में तब्दील हुए आशियाने और उजड़े कारोबार इस प्राकृतिक आपदा की भयावहता बयां कर रहे हैं। स्थानीय लोग इस मलबे के बीच अपने घर, सामान और अपनों की तलाश में जुटे हैं।
मधेश से पहाड़ तक पहुंची मदद की आवाज
त्रासदीग्रस्त क्षेत्र की स्थिति का जायजा लेने नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय सदस्य और सर्लाही जिले से पूर्व प्रदेश सदस्य (विधायक) अशोक यादव 12 सदस्यीय टीम के साथ पहाड़ी क्षेत्र पहुंचे।
टीम ने नुवाकोट जिले के देवीघाट, ढुंगे बाजार और त्रिशूली बाजार समेत आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान टीम ने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया।
रसुवा जाने वाला मार्ग अवरुद्ध होने के कारण टीम वहां नहीं पहुंच सकी।
‘पहाड़ का दर्द केवल पहाड़ का दर्द नहीं’
त्रिशूली बाजार की स्थिति देखने के बाद अशोक यादव ने कहा कि नेपाल के किसी भी हिस्से में आई आपदा पूरे देश की त्रासदी है।
उन्होंने कहा, “पहाड़ का दर्द केवल पहाड़ का दर्द नहीं है और मधेश का दर्द केवल मधेश तक सीमित नहीं रह सकता। नेपाल के किसी भी हिस्से में इंसानियत पर संकट आए तो पूरा देश एक परिवार की तरह खड़ा होता है।”
उनके मुताबिक संकट की घड़ी में क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर पीड़ितों के साथ खड़ा होना जरूरी है।
भारत की मदद की सराहना
अशोक यादव ने आपदा के बाद भारत की ओर से राहत और सहायता पहुंचाने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने संकट की घड़ी में मित्रता का फर्ज निभाया है।
उन्होंने नेपाल की मदद के लिए आगे आए अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रति भी आभार जताया।
‘मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज हो’
यादव ने नेपाल सरकार से राहत और बचाव अभियान को युद्धस्तर पर तेज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी भी कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। ऐसे में खोज और राहत दलों को प्रभावित इलाकों तक जल्द से जल्द पहुंचाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों की मौत हुई है, उनके शवों की तलाश कर उन्हें जल्द परिजनों को सौंपा जाना चाहिए।
“किसी अपने को खोने का दर्द बेहद असहनीय है, लेकिन अपनों के लापता होने और उनके लौटने का इंतजार उससे भी ज्यादा पीड़ादायक है।”
मलबे के बीच जिंदगी फिर खड़ी करने की चुनौती
त्रिशूली बाजार में बाढ़ ने सिर्फ घर और दुकानें नहीं उजाड़ीं, बल्कि लोगों की वर्षों की मेहनत और कमाई को भी प्रभावित किया है। अब स्थानीय लोगों के सामने दोहरी चुनौती है—लापता अपनों की तलाश और उजड़ी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना।
नेपाल की यह त्रासदी एक बार फिर यह संदेश दे रही है कि आपदा के सामने पहाड़ और मधेश की दूरी छोटी पड़ जाती है। संकट की घड़ी में पूरा नेपाल एक-दूसरे के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।
अब जरूरत है कि राहत, खोज और पुनर्वास का अभियान तेजी से आगे बढ़े, ताकि मलबे के बीच जिंदगी फिर से सांस ले सके।
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