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Bihar: कूड़े के डिब्बे से खुला खरीद का राज? बिहार के अस्पतालों में डस्टबिन खरीद पर बवाल, मंत्री ने बैठाई जांच!

पटना: बिहार के सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है,...

पटना: बिहार के सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की खरीद को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग का ध्यान खींच लिया है। मामला अस्पतालों के लिए खरीदे गए डस्टबिन, दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और अन्य सामग्री से जुड़ा है। खरीद प्रक्रिया में कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश पर जांच के आदेश दिए गए हैं। विभाग के विशेष सचिव एमएस त्यागराजन को मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आखिर डस्टबिन खरीद पर क्यों उठे सवाल?

मामला बिहार चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि अस्पतालों के लिए डस्टबिन समेत कई जरूरी सामान की खरीद में वित्तीय अनियमितता हुई है।

मीडिया रिपोर्टों में 45 लीटर और 75 लीटर क्षमता वाले कुछ कंटेनरों की कीमत को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सामान्य बाजार में उपलब्ध डस्टबिन की कीमत से तुलना करते हुए शिकायतकर्ता की ओर से खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि संबंधित खरीद को लेकर यह दावा किया गया है कि ये सामान्य घरेलू डस्टबिन नहीं, बल्कि अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष कंटेनर हो सकते हैं। ऐसे उत्पादों की कीमत में उनके तकनीकी मकान, गुणवत्ता, आपूर्ति, इंस्टॉलेशन और अन्य लागत शामिल हो सकती है।

यही वजह है कि अब वास्तविक कीमत और खरीद प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

शिकायत पहुंची मंत्री तक तो हरकत में आया विभाग

जानकारी के अनुसार, बेगूसराय निवासी कौशलेश कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में खरीद प्रक्रिया से संबंधित कई आरोप लगाए गए और उनके समर्थन में दस्तावेज भी संलग्न किए गए।

शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि के अनुसार, प्राप्त शिकायत और उसके साथ उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर जांच की जा रही है।

जांच समिति को खरीद से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच अधिकारी के सामने कई बड़े सवाल

विशेष सचिव एमएस त्यागराजन की अगुवाई में होने वाली जांच में खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसमें यह देखा जाना अहम होगा कि टेंडर किस प्रक्रिया से जारी हुआ और सामान की कीमत तय करने का आधार क्या था।

जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर गौर किया जा सकता है—

  • खरीद के लिए टेंडर की प्रक्रिया क्या थी?
  • कितनी कंपनियों ने टेंडर में हिस्सा लिया?
  • सामान के तकनीकी मकान क्या निर्धारित किए गए थे?
  • कीमत तय करने के लिए बाजार दर या अन्य किस आधार का इस्तेमाल किया गया?
  • सप्लाई किस कंपनी या एजेंसी ने की?
  • सामान की गुणवत्ता और मात्रा का सत्यापन कैसे हुआ?
  • भुगतान से पहले किन दस्तावेजों की जांच की गई?
  • अस्पतालों में खरीदी गई सामग्री वास्तव में इस्तेमाल हो रही है या नहीं?

इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही खरीद प्रक्रिया की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।

शिकायतकर्ता ने CBI या निगरानी से जांच की मांग की

शिकायतकर्ता कौशलेश कुमार ने मामले को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से अपील की है कि यदि जरूरत हो तो मामले की जांच CBI या राज्य की निगरानी एजेंसी से कराई जाए।

उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच से खरीद प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी की वास्तविकता सामने आ सकती है।

हालांकि, फिलहाल विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई है और किसी तरह की अनियमितता को आधिकारिक तौर पर साबित नहीं माना गया है।

डस्टबिन के साथ दवा और मेडिकल उपकरण भी जांच के दायरे में

यह मामला केवल डस्टबिन तक सीमित नहीं है। शिकायत में आवश्यक दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य सामग्री की खरीद में भी कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

इसलिए जांच के दौरान केवल एक उत्पाद की कीमत की पड़ताल नहीं होगी, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों को देखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों या संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पतालों के लिए खरीदे गए सामान की कीमत और खरीद प्रक्रिया वास्तव में नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

एक तरफ शिकायतकर्ता ने गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी तरफ यह तर्क भी सामने आया है कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल वेस्ट कंटेनरों की तुलना सामान्य घरेलू डस्टबिन से नहीं की जा सकती।

ऐसे में टेंडर दस्तावेज, तकनीकी स्पेसिफिकेशन, सप्लाई रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी कागजात और बाजार दर की जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।

फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब सबकी नजर उस रिपोर्ट पर है, जिसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला महज कीमतों को लेकर पैदा हुआ विवाद है या खरीद प्रक्रिया में वास्तव में कोई गंभीर अनियमितता हुई है।

Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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