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Bihar: बाबा बासुकीनाथ के दरबार में आस्था का सैलाब, 47 लाख श्रद्धालुओं ने चढ़ाया जल; जीरो कैजुअल्टी के साथ श्रावणी मेला संपन्न!Bihar: कूड़े के डिब्बे से खुला खरीद का राज? बिहार के अस्पतालों में डस्टबिन खरीद पर बवाल, मंत्री ने बैठाई जांच!Bihar: बिहार में फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 6 IAS अधिकारियों का तबादला; पूर्व सिवान DM विवेक रंजन मैत्रेय को मिली नई जिम्मेदारी!Bihar: जिस डॉक्टर ने बचाईं होंगी कई जानें, उसी की अस्पताल में देर से मिली इलाज, तड़प-तड़पकर गई जान, स्वास्थ्य मंत्री से जाँच की मांग!Bihar: नेपाल में राहत-बचाव पर PM बालेन शाह का बड़ा बयान: ‘विदेशी मदद ठुकराने का प्रचार भ्रामक’; 5 हजार लोगों के संपर्कविहीन होने की आशंका!Bihar: शेखपुरा के छोटे से गांव से निकले कृष्ण कन्हैया ने रचा बड़ा मुकाम, बिहार अवार्ड सेरेमनी में मिला ‘बेस्ट स्पोर्ट्समैनशिप अवार्ड’!Bihar: नेपाल की भीषण बाढ़ में पूर्वी चंपारण के एक ही परिवार के पांच लोग लापता होने की आशंका!Bihar: नेपाल फ्लैश फ्लड में फंसे महाराष्ट्र के 106 तीर्थयात्री सुरक्षित निकाले गए, सीतामढ़ी प्रशासन ने संभाला मोर्चा!Bihar: हाजिरी को लेकर बवाल, महिला सफाईकर्मी से मारपीट का आरोप, पार्षद और सुपरवाइजर पर FIR; CCTV ने बढ़ाई मुश्किल!Bihar: रक्षाबंधन पर घर लौटे शिक्षक की हत्या, फोन कर घर से बुलाया और फिर नहीं लौटे; RJD नेता के भाई थे रणधीर!Bihar: पटना में IPS अधिकारी की पत्नी ने की आत्महत्या की कोशिश, ड्राइवर ने पहुंचाया अस्पताल; पारिवारिक विवाद की जांच!Bihar: शेखपुरा में नल-जल की नाकामी पर गरमाई बात, मंत्री से मिलीं भाजपा जिलाध्यक्ष; अधिकारियों को तुरंत सुधार के निर्देश!

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Bihar: नेपाल में राहत-बचाव पर PM बालेन शाह का बड़ा बयान: ‘विदेशी मदद ठुकराने का प्रचार भ्रामक’; 5 हजार लोगों के संपर्कविहीन होने की आशंका!

भारत/नेपाल: नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।...

भारत/नेपाल: नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। आपदा के तीसरे दिन भी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में फंसे और लापता लोगों तक पहुंचना है। इसी बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने विदेशी सहायता को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि नेपाल ने किसी भी विदेशी सहयोग को अस्वीकार नहीं किया है।

प्रधानमंत्री शाह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक विस्तृत अपडेट जारी करते हुए कहा कि ‘विदेशी सहयोग अस्वीकार किया गया है’ कहना भ्रामक है। उनके मुताबिक, भारत, चीन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ बचाव एवं राहत कार्यों के लिए आवश्यक सहयोग और सामग्री को लेकर लगातार समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि हेलिकॉप्टरों की तैनाती करते समय हवाई सुरक्षा, प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और वास्तविक आवश्यकता को ध्यान में रखा जा रहा है।

15,431 सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे

प्रधानमंत्री शाह के अनुसार, खोज और बचाव अभियान में नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के 15,431 जवान लगाए गए हैं।

इनमें नेपाल पुलिस के 4,473, नेपाली सेना के 6,755 और सशस्त्र पुलिस बल के 4,203 जवान शामिल हैं। ये टीमें रसुवा तथा भोटेकोशी-त्रिशूली कॉरिडोर समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं।

अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें जलविद्युत परियोजना की सुरंग से बचाए गए 191 लोग भी शामिल हैं। शुक्रवार के हवाई बचाव अभियान में 517 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।

बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना और निजी क्षेत्र के कुल 16 हेलिकॉप्टर लगाए गए हैं। धुंचे, त्रिशूली, टिमुरे और स्याफ्रुबेँसी समेत प्रभावित इलाकों में लगातार शटल उड़ानें संचालित की जा रही हैं। अब तक 99 हवाई उड़ानें पूरी हो चुकी हैं।

5 हजार लोगों के संपर्कविहीन होने की आशंका

बाढ़ के तीन दिन बाद भी प्रभावित और लापता लोगों का वास्तविक आंकड़ा स्पष्ट नहीं हो पाया है। सरकार के प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन के अनुसार करीब 5,000 लोग संपर्कविहीन हो सकते हैं।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, बाढ़ से पहले रसुवा के गोसाईंकुंड से नुवाकोट के देवीघाट तक करीब 5,000 मोबाइल उपयोगकर्ता सक्रिय थे, लेकिन बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका है। नेपाल टेलीकॉम और एनसेल से मिले मोबाइल नेटवर्क संबंधी आंकड़ों के आधार पर यह प्रारंभिक आकलन किया गया है।

वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी आंकड़ों में अब तक 1,924 लोगों के संपर्कविहीन होने की जानकारी दी गई है। इनमें 933 लोग जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी बताए गए हैं।

अलग-अलग सरकारी आंकड़ों और तकनीकी आकलनों में अंतर होने की वजह से लापता लोगों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने और सड़क संपर्क टूटने से भी आंकड़े जुटाने में परेशानी आ रही है।

जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में रेस्क्यू सबसे बड़ी चुनौती

भोटेकोशी बाढ़ से रसुवा के कई हिस्सों में जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई कर्मचारी और अन्य लोग सुरंगों के भीतर फंस गए हैं। इन सुरंगों तक पहुंचना राहत दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने नेपाल के लिए विशेष रेस्क्यू टीम और तकनीकी सामग्री भेजी है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी।

भारत की ओर से भेजी गई टीम का उद्देश्य सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के अभियान में तकनीकी सहायता देना है। इसके साथ आवश्यक बचाव उपकरण भी नेपाल भेजे गए हैं।

भारत ने 10 टन राहत सामग्री भी भेजी

भारत ने रेस्क्यू टीम और तकनीकी सामग्री के अलावा 10 टन राहत सामग्री भी नेपाल भेजी है। इससे पहले भारत दो बार राहत सामग्री लेकर विमान नेपाल भेज चुका है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी अपने अपडेट में कहा है कि भारत, चीन और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। ऐसे में विदेशी सहायता को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही कई तरह की चर्चाओं को उन्होंने भ्रामक बताया है।

32 ट्रक राहत सामग्री प्रभावित इलाकों में भेजी गई

नेपाल सरकार के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों में अब तक खाद्य और गैर-खाद्य सामग्री से भरे 32 ट्रक भेजे जा चुके हैं। हेलिकॉप्टर के जरिए भी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

राहत कार्यों के साथ प्रभावित इलाकों में संचार उपकरण भी भेजे जा रहे हैं, ताकि बचाव दल और स्थानीय प्रशासन के बीच संपर्क बेहतर बनाया जा सके।

नदी किनारे के इलाकों में खोज अभियान का दायरा बढ़ा

बचाव अभियान को अब केवल रसुवा तक सीमित नहीं रखा गया है। त्रिशूली-नारायणी नदी कॉरिडोर में खोज अभियान का दायरा बढ़ाते हुए रसुवा से नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुँ, चितवन और नवलपरासी तक सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है।

नदी के निचले हिस्सों में भी लापता लोगों की तलाश की जा रही है। प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव के कारण कुछ लोग प्रभावित इलाकों से दूर तक बह गए हो सकते हैं।

विदेशी नागरिकों की भी तलाश

नेपाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार अब तक 129 विदेशी पर्यटकों और नागरिकों का बचाव एवं पहचान की जा चुकी है।

विदेश मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों से संबंधित जानकारी जुटाने और उनके परिवारों तथा संबंधित दूतावासों से संपर्क के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम भी संचालित किया है।

वहीं, संपर्कविहीन विदेशी नागरिकों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुक्रवार शाम तक नेपाल सरकार को विदेशी नागरिकों से संबंधित करीब 2,000 आवेदन मिलने की जानकारी भी सामने आई।

2 लाख से ज्यादा SMS अलर्ट भेजे गए

भोटेकोशी और निचले तटीय क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

सरकार की ओर से 2 लाख से अधिक SMS अलर्ट भेजकर लोगों को संभावित खतरे के प्रति आगाह किया गया है।

सड़क और पुल बहाल करने की कोशिश

बाढ़ से कई जगह सड़क और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकार ने वैकल्पिक मार्गों के जरिए छोटे चारपहिया वाहनों का संचालन शुरू करने की जानकारी दी है।

काठमांडू-मुग्लिन सड़क को एकतरफा यातायात के लिए चालू किया गया है। रसुवा को भी वैकल्पिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने का काम किया गया है।

क्षतिग्रस्त पुलों के आसपास बाइपास तैयार किए जा रहे हैं। नियमित सड़क संपर्क बहाल करने के लिए भारत से 48 मीटर लंबे 10 बैली ब्रिज उपलब्ध कराने की औपचारिक पहल भी की गई है।

बिजली और टेलीकॉम सेवा बहाल करने का काम जारी

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और मोबाइल नेटवर्क की बहाली भी प्राथमिकता में है। सरकार के मुताबिक प्रभावित 198 टेलीकॉम साइटों में से 145 साइट चालू हो चुकी हैं।

नेपाल टेलीकॉम की 120 में से 82 साइट और एनसेल की 78 में से 63 साइट को बहाल कर लिया गया है। बाकी साइटों पर तकनीकी और ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने का काम जारी है।

नुवाकोट के करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल होने की जानकारी दी गई है। धुंचे में भी बिजली सेवा शुरू करने के लिए काम जारी है।

अस्पतालों को अलर्ट, मेडिकल टीमें भेजी गईं

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र सक्रिय किया गया है। छह अस्पतालों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

वीर अस्पताल, राष्ट्रीय ट्रॉमा सेंटर और धुलिखेल अस्पताल समेत विभिन्न संस्थानों से मेडिकल टीमें प्रभावित क्षेत्रों के लिए भेजी गई हैं। आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य सामग्री की व्यवस्था की गई है।

कम से कम 5,000 लोगों के लिए टेंट और आपातकालीन स्वास्थ्य सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

राहत के लिए 1.9 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा जुटे

प्रधानमंत्री राहत कोष में पिछले करीब 36 घंटों में 1.9 अरब नेपाली रुपये से अधिक जमा होने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा बाढ़ और आपदा से प्रभावित 15 स्थानीय निकायों को तत्काल राहत एवं बचाव कार्यों के लिए कुल 6 करोड़ 75 लाख नेपाली रुपये उपलब्ध कराए गए हैं।

सरकार प्रभावित परिवारों और कारोबारियों के लिए राहत एवं पुनर्वास पैकेज तैयार कर रही है। बिजनेस रिकवरी पैकेज पर भी काम शुरू किया गया है।

अस्पताल के बाहर अपनों की तलाश में पहुंच रहे लोग

आपदा के बाद काठमांडू के अस्पतालों और संबंधित केंद्रों पर अपने रिश्तेदारों की तलाश में लोगों की भीड़ देखी जा रही है। कई परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं और उनकी तलाश में मदद की गुहार लगा रहे हैं।

संचार व्यवस्था बाधित होने और कई इलाकों का संपर्क टूटने के कारण परिवारों के लिए अपने लोगों की स्थिति जानना मुश्किल बना हुआ है। राहत शिविरों, अस्पतालों और प्रशासनिक केंद्रों पर लोग अपने परिजनों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार ने कहा- पूरा ध्यान प्रभावित नागरिकों पर

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि इस समय सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित नागरिकों पर केंद्रित है। उनका कहना है कि जमीनी स्थिति को समझकर जरूरी निर्णय लिए जा रहे हैं और उसी के अनुसार संसाधन जुटाए जा रहे हैं।

उन्होंने राहत, बचाव और पुनर्वास अभियान में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ स्वास्थ्य संस्थानों, रेडक्रॉस, नेपाल स्काउट, स्वयंसेवी संगठनों, निजी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के सहयोग को एकीकृत करने की बात कही।

नेपाल में जारी यह आपदा राहत और बचाव तंत्र के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। लापता लोगों की वास्तविक संख्या, सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की स्थिति और नदी के निचले हिस्सों में मिले लोगों की पहचान आने वाले समय में तस्वीर को और स्पष्ट करेगी।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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