मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी में नवजात की खरीद-फरोख्त का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, जन्म के महज एक दिन बाद ही एक दंपती ने अपने नवजात बच्चे को 4.50 लाख रुपये में बेच दिया। इस कथित सौदे में बच्चे के माता-पिता, एक आशा कार्यकर्ता, महिला बिचौलिया और बच्चे को अपने पास रखने वाली महिला शामिल थी।
मामले का खुलासा किसी बड़ी शिकायत या सूचना से नहीं, बल्कि बकाया 10 हजार रुपये को लेकर सड़क पर हुए विवाद से हुआ। 23 अगस्त की शाम सदर अस्पताल के सामने पैसों के लेन-देन को लेकर जब दोनों पक्षों में विवाद हुआ तो आसपास भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ के दौरान पूरे मामले की परतें खुलने लगीं।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नवजात को सकुशल बरामद कर लिया। मामले में कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जन्म के दूसरे दिन ही बच्चे का सौदा करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, मामला हरसिद्धि थाना क्षेत्र के कोबरा पकड़िया टोला निवासी प्रमोद साहनी और इंदु देवी से जुड़ा है। दंपती के बच्चे का जन्म 8 अगस्त को मोतिहारी के एक निजी अस्पताल में हुआ था।
आरोप है कि जन्म के अगले ही दिन यानी 9 अगस्त को एक महिला बच्चे को आईसीयू में रखने की बात कहकर अपने साथ ले गई। इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से बच्चे को निःसंतान महिला को सौंपने का कथित सौदा हुआ।
पुलिस की जांच में सामने आया कि इस पूरे लेन-देन में घोड़ासहन थाना क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता शोभा सिंह और नगर थाना क्षेत्र की तान्या खातून उर्फ कुरैशा खातून की भूमिका सामने आई।
4.50 लाख रुपये में हुई कथित डील
पुलिस के अनुसार, नवजात को चिंता देवी नाम की महिला को 4.50 लाख रुपये में देने का सौदा हुआ था। चिंता देवी लाइन बसवरिया की रहने वाली बताई गई हैं।
आरोप है कि इस रकम में से बच्चे के माता-पिता को करीब 1.60 लाख रुपये दिए गए, जबकि बाकी रकम कथित तौर पर सौदे में शामिल अन्य लोगों के बीच तय हिस्से के अनुसार जानी थी। हालांकि, पुलिस ने माता-पिता के पास से 1.50 लाख रुपये बरामद किए हैं।
रकम के बंटवारे में 10 हजार रुपये के कथित बकाये को लेकर विवाद हुआ और यही विवाद पूरे मामले के खुलासे की वजह बन गया।
23 अगस्त को सड़क पर भिड़े पक्ष
16 दिन तक मामले की भनक पुलिस को नहीं लगी। लेकिन 23 अगस्त की शाम सदर अस्पताल के सामने पैसों के लेन-देन को लेकर बच्चे के माता-पिता और सौदे से जुड़ी महिलाओं के बीच विवाद शुरू हो गया।
देखते ही देखते मामला सड़क पर पहुंच गया और वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। किसी स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दे दी।
नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लेकर थाने लाई। पूछताछ के दौरान पुलिस को नवजात की कथित खरीद-फरोख्त की जानकारी मिली।
पुलिस ने तेजी से की कार्रवाई, खरीदार के पास से मिला बच्चा
मामले की गंभीरता सामने आने के बाद नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर संबंधित ठिकाने पर छापेमारी की और चिंता देवी के पास से नवजात को सकुशल बरामद कर लिया।
इसके बाद पुलिस ने बच्चे के माता-पिता प्रमोद साहनी और इंदु देवी, महिला बिचौलिया तान्या खातून उर्फ कुरैशा खातून, आशा कार्यकर्ता शोभा सिंह और बच्चे को अपने पास रखने वाली चिंता देवी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने माता-पिता के पास मौजूद कथित सौदे की रकम में से 1.50 लाख रुपये भी जब्त किए हैं।
दंपती की सातवीं संतान होने की बात सामने आई
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी दंपती के पहले से छह बच्चे हैं। पुलिस के अनुसार, यह उनका सातवां बच्चा था और आरोप है कि जन्म के तुरंत बाद ही उसे पैसे के लिए दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया।
वहीं, नवजात को अपने पास रखने वाली महिला के बारे में पुलिस का कहना है कि वह निःसंतान है। काफी समय से बच्चे की चाहत को लेकर उसने आशा कार्यकर्ता से संपर्क किया था। इसके बाद कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से बच्चे को लेने की प्रक्रिया शुरू हुई।
अस्पताल से शुरू हुआ मामला, बिचौलियों तक पहुंची जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे को अस्पताल से किस तरह बाहर ले जाया गया और इसमें अस्पताल या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
साथ ही पुलिस कथित सौदे में रकम के लेन-देन, बिचौलियों की भूमिका और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता की भी जांच कर रही है।
पुलिस खंगाल रही पूरे नेटवर्क की कड़ियां
नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन के अनुसार, मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस मामले में इनके अलावा कोई और व्यक्ति भी शामिल था।
यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
10 हजार के विवाद ने खोल दिया पूरा राज
मोतिहारी के इस मामले में सबसे अहम बात यह रही कि कथित 4.50 लाख रुपये के सौदे का राज बकाया 10 हजार रुपये को लेकर हुए विवाद से खुला। जन्म के अगले दिन बच्चे को सौंपे जाने से लेकर 16 दिन बाद पुलिस द्वारा उसे सकुशल बरामद किए जाने तक कई लोगों की भूमिका जांच के घेरे में आ गई है।
फिलहाल पुलिस ने नवजात को सुरक्षित बरामद कर लिया है और मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों से पूछताछ के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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