प्रयागराज/पटना: एक तरफ हाथ में B.Ed., PG और CTET की डिग्रियां, दूसरी तरफ नौकरी का लंबा इंतजार। प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों ने रोजगार की तलाश में झेल रहे संघर्ष की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिसने मंच पर मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया।
कांग्रेस की ओर से साझा किए गए वीडियो में एक अभ्यर्थी ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसकी मां ने B.Ed. की पढ़ाई कराने के लिए जमीन तक बेच दी। अभ्यर्थी का कहना था कि पिछले चार वर्षों से शिक्षक भर्ती में नई वैकेंसी का इंतजार है और परिवार पर पढ़ाई व रहने का खर्च लगातार बोझ बनता जा रहा है।
चार साल से भर्ती का इंतजार
अभ्यर्थियों के मुताबिक, बिहार में शिक्षक भर्ती की अगली प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से इंतजार बना हुआ है। सितंबर में प्रस्तावित TRE-4 परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थी नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं।
कार्यक्रम में युवाओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान परिवार आर्थिक दबाव झेलते हैं। कई अभ्यर्थी पटना जैसे शहरों में रहकर तैयारी कर रहे हैं, जहां हर महीने रहने, खाने और पढ़ाई का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।
एक अभ्यर्थी ने मंच से अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वह B.Ed., PG और CTET जैसी योग्यताएं हासिल कर चुका है, लेकिन रोजगार का रास्ता अभी भी साफ नहीं है।
पढ़ाई करें तो भर्ती नहीं, आवाज उठाएं तो कार्रवाई
कार्यक्रम में बिहार के छात्रों ने भर्ती में देरी के साथ आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। एक छात्रा ने पटना में छात्रों के प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी।
छात्रों का आरोप है कि रोजगार और परीक्षा से जुड़े सवाल उठाने पर उन्हें प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। हालांकि, कार्यक्रम में सामने रखे गए इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।
मंच से बोला गया- संघर्ष जारी रहेगा
अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा समयबद्धता चाहते हैं।
छात्रों की गूंज’ में बिहार बना बड़ा मुद्दा
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों की समस्याओं को सामने लाना था। कार्यक्रम में पेपर लीक, बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों में देरी, परीक्षा प्रणाली और महंगी शिक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों की कहानी ने इस कार्यक्रम में खास ध्यान खींचा। एक ओर वर्षों की पढ़ाई और परिवार की आर्थिक कुर्बानी है, तो दूसरी ओर सरकारी नौकरी का इंतजार। यही विरोधाभास अब बिहार के हजारों प्रतियोगी परीक्षार्थियों की चिंता का बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रहा है।
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