पलामू: झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती शिक्षिका को समय पर छुट्टी नहीं मिलने के कारण अपना बच्चा खोना पड़ा। घटना के बाद शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लेस्लीगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली शिक्षिका भारती पांडेय, जो तरहसी के सिलदीलिया प्लस टू विद्यालय में कार्यरत हैं और वर्तमान में चैनपुर के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्रतिनियुक्त थीं, गर्भावस्था के अंतिम महीने में भी रोज करीब 35 किलोमीटर का सफर कर स्कूल जा रही थीं।
शनिवार को स्कूल में ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में ही बच्चे की मौत हो चुकी है।
पति का आरोप—छुट्टी के लिए मांगे ₹50 हजार
शिक्षिका के पति और पुलिसकर्मी मुकेश कुमार तिवारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) संदीप कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी पत्नी ने 3 जुलाई को मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया था, लेकिन छुट्टी नहीं दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि छुट्टी मंजूर करने के बदले ₹50 हजार की रिश्वत मांगी गई। यहां तक कि ₹25 हजार देने की बात कहने के बाद भी छुट्टी नहीं दी गई।
परिवार का कहना है कि पांच दिन पहले डीसी ने भी छुट्टी देने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
DEO का जवाब—मातृत्व अवकाश का जिक्र नहीं था
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि आवेदन में मातृत्व अवकाश का जिक्र नहीं था, बल्कि चाइल्ड केयर लीव मांगी गई थी, जो अलग श्रेणी की छुट्टी होती है।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी तंत्र और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर भ्रष्टाचार और अमानवीयता का मामला बनता है।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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