देवघर: देशभर के शिव भक्तों तक बाबा बैद्यनाथ धाम का प्रसाद पहुंचाने का सपना लेकर शुरू की गई ‘विशेष प्रसादम योजना’ अब सवालों के घेरे में है। साल 2021 में शुरू हुई यह योजना पांच साल बाद भी श्रद्धालुओं के बीच अपनी पहचान नहीं बना पाई।
जिस योजना के जरिए देवघर आने में असमर्थ श्रद्धालु घर बैठे बाबा का प्रसाद पा सकते थे, वह प्रचार-प्रसार की कमी के कारण सीमित दायरे में सिमटकर रह गई है।
न कांवड़ यात्रा का फायदा मिला, न देशभर में पहुंची पहचान
योजना के तहत श्रद्धालु 251 या 501 रुपये का मनीऑर्डर देवघर मुख्य डाकघर भेजकर बाबा बैद्यनाथ धाम का प्रसाद मंगा सकते हैं। इसके बाद डाक विभाग श्रद्धालुओं के पते पर प्रसाद पहुंचाता है।
251 रुपये के पैकेट में करीब 250 ग्राम और 501 रुपये के पैकेट में करीब 500 ग्राम प्रसाद भेजा जाता है। इसमें देवघर का प्रसिद्ध पेड़ा, चूड़ा, भभूत, सिंदूर और पूजा सामग्री शामिल होती है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि पांच साल में इस सुविधा का लाभ केवल 150 से 200 श्रद्धालु ही उठा पाए हैं।
योजना अच्छी थी, लेकिन पहुंच नहीं बनी
डाक विभाग के अधिकारियों का मानना है कि योजना का अपेक्षित प्रचार नहीं हो पाया, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी ही नहीं मिल सकी।
देवघर मुख्य डाकघर के अधीक्षक एसके मिश्रा ने बताया कि अब योजना को लोगों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। श्रावणी मेले के दौरान होटल, चौक-चौराहों और प्रमुख स्थानों पर प्रचार सामग्री लगाने की तैयारी है।
बाबा का प्रसाद… लेकिन भक्तों तक पहुंचने में रुकावट
श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर इस योजना का प्रचार शुरुआत से ही बड़े स्तर पर किया जाता तो देश के हर कोने में बैठे शिव भक्त इसका लाभ उठा सकते थे और डाक विभाग को भी बेहतर राजस्व मिल सकता था।
अब सवाल यह है कि पांच साल तक चली इस योजना को आखिर लोगों तक पहुंचाने में इतनी देरी क्यों हुई? क्या नया प्रचार अभियान बाबा बैद्यनाथ के प्रसाद को देशभर के भक्तों तक पहुंचा पाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।
ये खबर भी पढ़े: Jharkhand: रजरप्पा धाम में गूंजे मंत्र और शंखनाद, मां छिन्नमस्तिका को अर्पित हुआ छप्पन भोग!