बोकारो: झारखंड के चर्चित बोकारो वन भूमि घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ा शिकंजा कसा है। करोड़ों रुपये की सरकारी वन भूमि की कथित खरीद-बिक्री के मामले में CID ने मुख्य आरोपियों में शामिल शैलेश कुमार सिंह को बिहार के पटना से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे रांची लाया गया, जहां कोर्ट में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
लेकिन इस गिरफ्तारी के साथ ही अब कई बड़े सवाल भी खड़े हो गए हैं—आखिर 103 एकड़ संरक्षित वन भूमि को कागजों में निजी जमीन कैसे बना दिया गया? किसके संरक्षण में फर्जी दस्तावेज तैयार हुए? और इस पूरे खेल में कौन-कौन शामिल थे?
जंगल की जमीन को बना दिया ‘निजी संपत्ति’?
CID की जांच के अनुसार, मामला बोकारो जिले के तेतुलिया मौजा की संरक्षित वन भूमि से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन को निजी बताकर बेचने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि शैलेश कुमार सिंह ने इजहार अंसारी और अख्तर अंसारी से पावर ऑफ अटॉर्नी ली थी। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी कागजात के आधार पर जमीन के सौदे किए गए।
दस्तावेजों में छिपा था बड़ा खेल
जांच एजेंसियों को रिकॉर्ड की पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। आरोप है कि पुराने सरकारी रिकॉर्ड के महत्वपूर्ण पन्नों से छेड़छाड़ की गई और कुछ दस्तावेज गायब पाए गए।
सबसे बड़ा सवाल उस दावे पर उठा, जिसमें जमीन मालिकाना हक को लेकर पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया गया था। जांच में सामने आया कि जिस व्यक्ति के नाम से वर्ष 1933 में जमीन खरीद का दावा किया गया, उस समय उसकी उम्र महज 9 साल 5 महीने थी।
11 गुना कीमत पर बेची गई जमीन!
जांच एजेंसियों के अनुसार, जमीन की कीमतों में भी बड़ा अंतर सामने आया। आरोप है कि सरकारी सर्किल रेट से कई गुना अधिक कीमत पर जमीन की खरीद-बिक्री की गई।
सरकारी दर और वास्तविक भुगतान के बीच भारी अंतर मिलने के बाद जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया।
अब खुलेगा पूरा नेटवर्क?
बोकारो वन भूमि घोटाले में सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। CID और ED दोनों इस मामले की जांच कर रहे हैं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे खेल में भू-माफिया, बिचौलियों और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
फिलहाल शैलेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब नजर इस बात पर है कि पूछताछ में कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और करोड़ों की वन भूमि के इस कथित घोटाले की कितनी परतें खुलती हैं।
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