शेखपुरा: रामनवमी के अवसर पर शनिवार को शेखपुरा शहर आस्था, उत्साह और भक्ति के रंग में पूरी तरह डूबा नजर आया। श्री रामनवमी शोभा यात्रा समिति के तत्वावधान में निकाली गई भव्य शोभायात्रा ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया।

यह विशाल शोभायात्रा शहर के तीन मुहानी हनुमान मंदिर से पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुई और लगभग 8 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गिरिहिन्डा हनुमान मंदिर पर जाकर संपन्न हुई।
शोभायात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरा शहर ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठा। जुलूस में भगवान राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के वेश में कलाकारों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न सांस्कृतिक झांकियां और कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

इस दौरान महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और तलवारबाजी तथा लाठी-भांजने जैसे पारंपरिक करतब दिखाए। महिलाओं के इन प्रदर्शनों ने लोगों को काफी प्रभावित किया और जुलूस में विशेष आकर्षण का केंद्र बना।
शोभायात्रा का मार्ग तीन मुहानी हनुमान मंदिर से शुरू होकर चांदनी चौक, कटरा चौक, माहुरी टोला, चकदीवान मोहल्ला और बुधौली बाजार जैसे प्रमुख इलाकों से होकर गुजरा। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर जुलूस का स्वागत किया।

इस दौरान रथ, घोड़े, ढोल-नगाड़े और भक्ति गीतों के साथ माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगा रहा। जुलूस में शामिल लोग झूमते-गाते हुए आगे बढ़ते रहे। इसी बीच ट्रैफिक थानाध्यक्ष द्वारा श्रद्धालुओं के साथ डांस करने का दृश्य भी चर्चा का विषय बना रहा, जिसने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। जुलूस के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जगह-जगह मजिस्ट्रेटों के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

इस दौरान एसडीओ प्रियंका कुमारी, एसडीपीओ डॉ. राकेश कुमार, थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार और पुलिस निरीक्षक राजीव कुमार सहित अन्य अधिकारी लगातार पूरे जुलूस की निगरानी करते रहे।
जुलूस के चलते कुछ समय के लिए शहर में यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन प्रशासन की सतर्कता के कारण स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई। पूरे आयोजन के दौरान जिला प्रशासन द्वारा हर गतिविधि पर नजर रखी गई, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कुल मिलाकर, शेखपुरा में रामनवमी का यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और उत्साह का भी शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया।
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