मौनी अमावस्या के पावन दिन जब प्रयागराज संगम आस्था के सैलाब से भर चुका था, उसी वक्त माघ मेले में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासन और सनातन परंपरा के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस ने संगम जाने से रोक दिया। नतीजा—धक्का-मुक्की, हिरासत, टूटती पालकी और बिना स्नान लौटते शंकराचार्य।
घटना की शुरुआत तब हुई जब पुलिस ने भीड़ का हवाला देते हुए शंकराचार्य से पालकी छोड़कर पैदल जाने को कहा। शिष्य नहीं माने और आगे बढ़ने लगे। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया। पुलिस और शिष्यों के बीच झड़प हुई, कई शिष्य हिरासत में ले लिए गए। आरोप है कि एक साधु को चौकी में पीटा गया।
Bihar News : हार के बाद बड़ा दांव! क्या 25 जनवरी को तेजस्वी संभालेंगे RJD की पूरी कमान?
इससे नाराज शंकराचार्य ने स्नान छोड़ शिष्यों को छुड़ाने को प्राथमिकता दी। अफसरों ने हाथ जोड़कर समझाने की कोशिश की, लेकिन करीब दो घंटे तक गतिरोध बना रहा। बाद में पुलिस ने पालकी को खींचते हुए संगम से करीब एक किलोमीटर दूर पहुंचा दिया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया और शंकराचार्य स्नान नहीं कर पाए।
Bihar News : जब ज़मीन पर उतरा कैलाश, मोतिहारी में विराजे दुनिया के सबसे विशाल महादेव!
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासन की “गुंडई” बताते हुए सीधे सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में भगदड़ पर सवाल उठाने की कीमत उनसे वसूली जा रही है। उनका आरोप है कि ऊपर से आदेश देकर संतों को अपमानित किया गया।
National News : ED रेड के खिलाफ दिल्ली से कोलकाता तक TMC का प्रदर्शन, 8 सांसद हिरासत में!
वहीं प्रशासन का पक्ष इससे बिल्कुल उलट है। डीएम और पुलिस कमिश्नर का कहना है कि शंकराचार्य बिना अनुमति, परंपरा के विपरीत और करीब 200 समर्थकों के साथ बैरियर तोड़कर संगम पहुंचे, जिससे लाखों श्रद्धालुओं को परेशानी हुई।
UP News : महराजगंज में पत्रकार पर अभद्रता, इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन!
एक तरफ संगम में 3 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे, दूसरी ओर संत और सिस्टम आमने-सामने थे। सवाल यही है—
क्या भीड़ प्रबंधन के नाम पर परंपरा टूटी या फिर नियमों से ऊपर आस्था रखी जा सकती है?