रांची: झारखंड में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सरकार और छात्रों के बीच तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रहने के बाद अभ्यर्थियों ने विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। आंदोलन को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है, वहीं विधानसभा के बाहर कंटीले तार लगाकर बैरिकेडिंग की गई है।
छात्रों की मुख्य मांग प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच सीबीआई से कराने की है। सरकार की ओर से बातचीत के दौरान कुछ मांगों पर सहमति के संकेत दिए गए, लेकिन सीबीआई जांच के मुद्दे पर छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इसी वजह से वार्ता का तीसरा दौर भी किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंच सका।
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, प्रदर्शन, धरना और सभा पर रोक लगाने की बात कही गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों और भ्रामक या भड़काऊ सोशल मीडिया संदेशों से बचने की अपील भी की है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू नजरबंद
छात्र आंदोलन को बीजेपी के समर्थन के बीच पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को उनके आवास पर नजरबंद किए जाने का दावा सामने आया है। बीजेपी ने इसे लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी का कहना है कि मुख्य विपक्षी दल होने के नाते वह छात्रों के आंदोलन को नैतिक समर्थन दे रही है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर छात्रों में असंतोष है और उनकी मांगों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए।
कंटीले तारों से घिरी विधानसभा, बढ़ी सुरक्षा
विधानसभा घेराव की घोषणा के बाद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी में जुटी हैं। विधानसभा के आसपास बैरिकेडिंग के साथ कंटीले तार लगाए गए हैं। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
सरकार की कोशिश है कि विधानसभा परिसर तक प्रदर्शनकारियों की भीड़ न पहुंच सके। वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कई छात्र नेताओं के भूमिगत होने की चर्चा
आंदोलन से पहले कई छात्र नेताओं के भूमिगत होने की भी चर्चा है। प्रशासन की ओर से आंदोलन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, छात्र नेताओं की ओर से इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन अपने अधिकारों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर है। वे सीबीआई जांच की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
रांची के स्कूलों पर भी पड़ा असर
आंदोलन और संभावित भीड़ को देखते हुए रांची के स्कूलों को बंद रखने का फैसला भी सामने आया है। प्रशासन को आशंका है कि प्रदर्शन और यातायात व्यवस्था के कारण छात्रों एवं आम लोगों को परेशानी हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की सियासत को भी गरमा दिया है। एक तरफ सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी छात्रों के समर्थन में सरकार पर हमलावर है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधानसभा घेराव के दौरान हालात किस दिशा में जाते हैं और क्या सरकार एवं आंदोलनकारी छात्रों के बीच कोई नया रास्ता निकल पाता है।
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