लखीसराय में जल संकट और हरियाली को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्टिव मोड में नजर आ रहा है। मंगलवार को जिला परिषद सभागार में जिला पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में जल-जीवन-हरियाली दिवस का आयोजन किया गया, जहां जल संरक्षण को लेकर बड़ी बातें सामने आईं।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुई, लेकिन असली फोकस उस चिंता पर रहा जो धीरे-धीरे बिहार के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है—गिरता हुआ जलस्तर। उप विकास आयुक्त सुमित कुमार ने साफ कहा कि राज्य में पानी की कमी नहीं है, लेकिन अनियमित बारिश, जल संचयन की कमी और भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल ने हालात बिगाड़ दिए हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की जल-जीवन-हरियाली योजना इसी संकट से निपटने का बड़ा अभियान है, जिसके तहत जल संरक्षण और हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। खासकर गांवों के तालाब, जो कभी जीवन का आधार थे, आज अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण खत्म होते जा रहे हैं।
लघु सिंचाई विभाग ने प्रस्तुतीकरण के जरिए बताया कि जिले में 5 एकड़ से बड़े तालाबों के जीर्णोद्धार पर तेजी से काम हो रहा है। निमिया, बड़हिया, सोना बाड़ी, रामगढ़ चौक और लखीसराय तालाब जैसे कई जलस्रोतों को फिर से जीवित किया जा चुका है।
फिलहाल शर्मा बड़ी तालाब का काम जारी है, जबकि हलसी के इमरत, बल्लूपुर और भ्रम तालाब के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
अंत में डीएम ने सभी विभागों को साफ निर्देश दिया कि जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाएं और योजनाओं को जमीन पर उतारने में कोई कमी न छोड़ें।
इस मौके पर विधायक रामानंद मंडल, जिला परिषद अध्यक्षा अंशु कुमारी समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, लखीसराय में अब पानी और हरियाली को बचाने की लड़ाई सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक मिशन बनती दिख रही है।
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