पटना: बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच निशांत कुमार के डिप्टी मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़ने से राजनीतिक समीकरण और पेचीदा हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, आज इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच चिराग पासवान और विजय चौधरी के बयानों से यह संकेत साफ है कि मुख्यमंत्री का पद भारतीय जनता पार्टी के पास जाएगा, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) को उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है।
जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन होगा। 15 अप्रैल को नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी है।
हालांकि, जदयू के भीतर सबसे बड़ी चुनौती निशांत कुमार को मनाने की है। बताया जा रहा है कि वे फिलहाल किसी पद पर आसीन होने के पक्ष में नहीं हैं और पहले जनता के बीच जाकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने में जुटे हैं।
अगर निशांत कुमार नहीं मानते हैं तो जदयू की ओर से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की योजना तैयार है, जिसमें एक सवर्ण और एक पिछड़े या दलित वर्ग से नेता को मौका मिल सकता है।
वहीं, नई कैबिनेट के गठन को लेकर भी फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है। करीब 32-33 मंत्रियों के साथ पूर्ण सरकार बन सकती है, जिसमें भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और आरएलएम के बीच मंत्रिपद का बंटवारा होगा।
सूत्रों की मानें तो भाजपा अपने कोटे में बड़े बदलाव के मूड में नहीं है, जबकि जदयू अपने पुराने और भरोसेमंद चेहरों पर ज्यादा विश्वास जता सकती है। साथ ही सामाजिक संतुलन साधने के लिए पिछड़े और दलित वर्ग के नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में अगले 24 घंटे बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं, जहां नए मुख्यमंत्री के साथ पूरी सरकार का खाका साफ हो जाएगा।
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