लखीसराय: कला, संस्कृति और क्षेत्रीय सिनेमा को समर्पित संस्था सिनेयात्रा द्वारा तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा – रजतपट की विरासत” का आयोजन 21 से 23 फरवरी 2026 तक लखीसराय संग्रहालय में किया जाएगा। इस आयोजन में बिहार की क्षेत्रीय भाषाओं में बनी पहली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा और उनके निर्माण से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।
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कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी, मगही और मैथिली सिनेमा की शुरुआत को दर्शाने वाली फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाईबो, पहली मगही फिल्म भैइया और पहली मैथिली फिल्म ममता गावैय गीत शामिल हैं। इन फिल्मों के निर्माण की कहानी और संघर्ष की यात्रा सिनेयात्रा के संस्थापक सचिव, फिल्मकार एवं इतिहासकार रविराज पटेल द्वारा साझा की जाएगी।
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आयोजन में सांस्कृतिक रंग भरने के लिए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह लखीसराय संग्रहालय के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष मृणाल रंजन द्वारा संगीत प्रस्तुति भी दी जाएगी।
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कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण मरणोपरांत लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड होगा, जिसमें लखीसराय के प्रतिष्ठित चिकित्सक और समाजसेवी स्वर्गीय डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी डॉ. राजकिशोरी सिंह को सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान में स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र, शॉल और इक्कीस हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। यह सम्मान उनके परिवार के सदस्यों द्वारा ग्रहण किया जाएगा।
सिनेयात्रा के संस्थापक अध्यक्ष आर.एन. दास कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र स्वागताध्यक्ष होंगे। आयोजकों का मानना है कि यह आयोजन बिहार की समृद्ध सिनेमाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
