पटना: बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के तत्वावधान में कंकड़बाग स्थित पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित बिहार ओपन FIDE रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ। कई राज्यों और देशों के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच चली इस बौद्धिक जंग में महाराष्ट्र के इंद्रजीत महिंद्रकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।
रूस के ग्रैंडमास्टर पीटर क्रियाकोव को उपविजेता और हरियाणा के पृथ्वी शर्मा को द्वितीय उपविजेता घोषित किया गया। खास बात यह रही कि तीनों खिलाड़ी 8-8 अंकों के साथ बराबरी पर थे, लेकिन टाई-ब्रेक में महिंद्रकर ने बाजी मार ली।

13 चालों में खत्म हुआ बड़ा मुकाबला
फाइनल राउंड में बोर्ड नंबर-1 पर क्रियाकोव ने शुरुआती गलती के बाद सिर्फ 13 चालों में मैच ड्रॉ कर दिया, जिससे मुकाबला और रोमांचक हो गया। दूसरी ओर इंद्रजीत ने शानदार जीत दर्ज कर सीधे शीर्ष पर कब्जा जमा लिया।
अब स्कूलों में भी पढ़ाया जाएगा शतरंज
पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि सुनील कुमार ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि शतरंज को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। उन्होंने इसे बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बेहद जरूरी बताया।
वहीं खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए बिहार से अधिक से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बिहार के खिलाड़ियों का भी दम
टूर्नामेंट में बिहार के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। किशन कुमार, विवेक शर्मा और अभिषेक राज जैसे खिलाड़ियों ने अलग-अलग वर्गों में अपनी छाप छोड़ी। महिला वर्ग में मरियम फातिमा ने बाजी मारी, जबकि सीनियर कैटेगरी में पी.के. सिंह अव्वल रहे।
नन्हे खिलाड़ियों ने भी बिखेरा जलवा
अंडर-7 से लेकर अंडर-15 तक के वर्गों में बच्चों ने जबरदस्त खेल दिखाया। बिहार के कई युवा खिलाड़ियों ने ट्रॉफी जीतकर यह साबित कर दिया कि राज्य में टैलेंट की कोई कमी नहीं है।

“खेल नहीं, अब मिशन बनेगा चेस”
इस आयोजन ने साफ कर दिया कि अब शतरंज सिर्फ खेल नहीं, बल्कि बिहार में एक मिशन बनने जा रहा है—जहां दिमाग की चाल से भविष्य की दिशा तय होगी।
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