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बिहार में वेतन घोटाले का खुलासा; मृत शिक्षक के नाम पर सैलरी, 200% HRA भुगतान; कई जिलों में जांच!

पटना: बिहार में सरकारी वेतन और मकान किराया भत्ता (HRA) के भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के मामले सामने...

पटना: बिहार में सरकारी वेतन और मकान किराया भत्ता (HRA) के भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। कहीं निर्धारित दर से कई गुना अधिक मकान किराया भत्ता दिया गया, तो कहीं फर्जी शिक्षिका के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये निकाल लिए गए। एक मामले में मृत शिक्षक के नाम पर दोबारा वेतन भुगतान किया गया, जबकि सहरसा में एक शिक्षिका के दिल्ली में रहने के बावजूद करीब 10 साल तक वेतन मिलने का मामला सामने आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पटना, भागलपुर, सुपौल, औरंगाबाद, बांका, समस्तीपुर, सहरसा, गया और मुजफ्फरपुर समेत बिहार के कई जिलों में वेतन भुगतान से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। तीन जिलों में ही करीब 3.58 करोड़ रुपये की कथित फर्जी निकासी की पुष्टि होने की बात कही गई है। बाकी जिलों में सामने आए मामलों की पूरी वित्तीय जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।

20% की जगह 200% HRA, पटना में 76.72 लाख की गड़बड़ी

पटना के गुलजारबाग स्थित एफएनएस एकेडमी उच्च माध्यमिक विद्यालय में वेतन और HRA भुगतान में करीब 76.72 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई। महालेखाकार की ऑडिट टीम के मुताबिक, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच कर्मचारियों को निर्धारित 20% की जगह 200% या उससे अधिक की दर से HRA का भुगतान किया गया।

मामले के सामने आने के बाद स्कूल के क्लर्क विजय कृष्ण विद्यार्थी और परिचारी संजू कुमारी को निलंबित किया गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के क्लर्क मनीष कुमार और तत्कालीन लिपिक अमित कुमार के खिलाफ 12 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त भुगतान की 76,71,983 रुपये की राशि नौ चेक के माध्यम से सरकारी कोष में वापस जमा कराई गई है। ब्याज की वसूली और विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

भागलपुर में फर्जी शिक्षिका बनाकर निकाले लाखों रुपये

भागलपुर में करीब 98.12 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग के संविदा कर्मी अविनाश राज पर तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर तनुश्री नाम से एक काल्पनिक शिक्षिका की प्रोफाइल बनाने का आरोप है।

बताया गया कि इस प्रोफाइल को अप्रैल 2025 की पिछली तारीख से सिस्टम में दर्ज किया गया। इसके आधार पर हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में 6.74 लाख रुपये भेजे गए। इसके अलावा, मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये के भुगतान और जुलाई-अगस्त में संदिग्ध भुगतान की कोशिश का भी उल्लेख किया गया है।

इस मामले में डिजिटल लॉगिन और वेतन भुगतान प्रक्रिया की जांच अहम मानी जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों से होनी है।

सुपौल में मां, सास और बहन के खातों में भेजी गई सरकारी राशि

सुपौल में करीब 1.83 करोड़ रुपये के कथित अवैध वेतन भुगतान का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक क्लर्क ने पहले भुगतान किए जा चुके वेतन और बकाया के नाम पर दोबारा बिल तैयार किए।

आरोप है कि नई पे-आईडी बनाकर शिक्षकों के नाम पर फर्जी खाते जोड़े गए और सरकारी राशि क्लर्क की मां, सास तथा बहन के खातों में ट्रांसफर की गई। इसी मामले में एक मृत सेवानिवृत्त शिक्षक के नाम पर भी दोबारा वेतन भुगतान कर निकासी किए जाने की बात सामने आई है।

मामले के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह से स्थापना शाखा का प्रभार वापस लिया गया और उनसे 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा गया।

सहरसा में दिल्ली में रह रही शिक्षिका को 10 साल तक मिलता रहा वेतन

सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय कांप गोठ उत्तर बाड़ी टोला में एक शिक्षिका को लेकर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित शिक्षिका करीब 10 साल से स्कूल नहीं जा रही थीं और दिल्ली में रह रही थीं, लेकिन उनके नाम पर वेतन भुगतान जारी रहा।

बताया गया कि स्कूल के हाजिरी रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज होती रही और उनकी अनुपस्थिति की जानकारी विभाग तक नहीं पहुंची। गुप्त शिकायत मिलने के बाद विशेष टीम ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। इसके बाद उपस्थिति रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई।

अब शिक्षिका के खिलाफ सेवा समाप्ति और कथित अवैध भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है।

औरंगाबाद में दो सरकारी संस्थानों से वेतन लेने का मामला

औरंगाबाद के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात क्लर्क कृष्ण प्रसाद वर्मा पर एक ही अवधि में दो अलग-अलग सरकारी संस्थानों से वेतन लेने का आरोप है। मामले की जांच के बाद जिलाधिकारी ने उन्हें निलंबित कर दिया।

गोह के प्रभारी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिव शंकर प्रसाद के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच समिति ने सेवा पुस्तिका, सेवा अभिलेख और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के पूर्वी झरिया क्षेत्र से प्राप्त दस्तावेजों समेत दूसरे रिकॉर्ड की जांच की।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 20 अक्टूबर को कृष्ण प्रसाद वर्मा को सिविल सर्जन कार्यालय में कथित तौर पर ताला तोड़कर प्रवेश करने और कागजात निकालने की कोशिश के आरोप में पुलिस ने पकड़ा था। इस घटना और वेतन संबंधी मामले की कानूनी स्थिति जांच के अधीन है।

कई जिलों में वेतन और भत्तों के रिकॉर्ड की जांच

वेतन भुगतान में गड़बड़ियों की शिकायत केवल इन पांच मामलों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांका में पिछले पांच वर्षों के वेतन रिकॉर्ड, सेवा पुस्तिकाओं और अवकाश से संबंधित भुगतानों की जांच की गई है।

समस्तीपुर में HRA और सिटी अलाउंस की प्रविष्टियों में गड़बड़ी सामने आने के बाद शिक्षकों के रिकॉर्ड का आधार और पैन से मिलान कराया जा रहा है। गया और मुजफ्फरपुर में पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों का मूल वेतन और HRA पात्रता से दो से तीन गुना तक बढ़ाकर दर्ज किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं।

भागलपुर और बांका के सरकारी कार्यालयों में प्रतिनियुक्त छह क्लर्कों को उनके मूल कार्यालय वापस भेजने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।

HRMS और CFMS सिस्टम में कैसे हुई गड़बड़ी?

बिहार में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन व भत्तों का भुगतान डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से किया जाता है। इनमें HRMS और CFMS जैसे पोर्टल की भूमिका महत्वपूर्ण है।

वेतन भुगतान की सामान्य प्रक्रिया में क्लर्क या डेटा ऑपरेटर बिल तैयार करता है, संबंधित अधिकारी उसकी जांच करता है और निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए भुगतान को मंजूरी देता है।

सामने आए मामलों में आरोप है कि कहीं लॉगिन आईडी का दुरुपयोग किया गया, कहीं पहले भुगतान हो चुके बिल दोबारा बनाए गए और कहीं मूल वेतन या HRA की राशि सिस्टम में बढ़ाकर दर्ज की गई। इन मामलों में यह जांचना जरूरी है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और भुगतान को मंजूरी देने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।

वेरिफिकेशन के बाद ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया

अनियमितताओं की शिकायतों के बाद वेतन भुगतान से पहले HRMS डेटा के सत्यापन पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 22 अक्टूबर 2026 तक शत-प्रतिशत डेटा वेरिफिकेशन पूरा करने का निर्देश दिया गया था। सत्यापन के बाद ही अगली वेतन प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।

रिपोर्ट में राज्य के करीब छह लाख शिक्षकों और आठ लाख अन्य कर्मियों के वेतन भुगतान पर अस्थायी रोक की बात भी कही गई है। इससे उन कर्मचारियों की चिंता बढ़ी है जिनका वेतन और सेवा रिकॉर्ड सही है।

वेतन में देरी होने पर किराया, बच्चों की फीस, इलाज, घरेलू खर्च और बैंक की किस्तों का भुगतान प्रभावित हो सकता है।

शिक्षा विभाग का दावा- पात्र कर्मचारियों को समय पर मिलेगा वेतन

शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि वेतन भुगतान रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विभागीय पक्ष के मुताबिक, वित्तीय अनियमितताओं की आशंका दूर करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वेतन तथा भत्तों के रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जा रहा है।

विभाग का कहना है कि जांच का उद्देश्य पात्र शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों का वेतन रोकना नहीं, बल्कि भुगतान प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।

सबसे बड़ा सवाल: सरकारी खजाने की निगरानी में चूक कहां हुई?

इन मामलों ने सरकारी वेतन भुगतान प्रणाली की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। यदि निर्धारित दर से कई गुना HRA का भुगतान हुआ, फर्जी प्रोफाइल बनाई गई या मृत कर्मचारी के नाम पर राशि निकाली गई, तो यह जांचना जरूरी है कि बिल तैयार करने, सत्यापन और अंतिम मंजूरी के स्तर पर नियंत्रण कैसे विफल हुआ।

अब जांच में कथित अवैध निकासी की पूरी राशि, जिम्मेदार लोगों की भूमिका, सरकारी धन की वसूली और डिजिटल सिस्टम में सुरक्षा खामियों का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, यह भी जरूरी है कि जांच के दौरान सही रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से वेतन संकट का सामना न करना पड़े।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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