गया: कभी नक्सली संगठन से जुड़ा रहा और सरकार की ओर से जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था, वही मनदीप यादव उर्फ मतल यादव अब अपनी जिंदगी को मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए सरकारी पुनर्वास योजना के लाभ का इंतजार कर रहा है। आत्मसमर्पण के वर्षों बाद भी जमीन और इनाम की राशि नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए मनदीप और उसके परिजन गया समाहरणालय पहुंचे और जिलाधिकारी को आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई।
मनदीप के मुताबिक, उसने 2020 में सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद करीब पांच साल जेल में रहा। उसका दावा है कि आत्मसमर्पण के समय पुनर्वास योजना के तहत 5 डिसमिल जमीन और घोषित इनाम की राशि देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक उसे इसका लाभ नहीं मिला।
बचपन में भटका, फिर छोड़ दिया नक्सल संगठन
मनदीप का कहना है कि वह कम उम्र में ही भटककर प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उसके अनुसार संगठन से जुड़े रहने के दौरान उसके खिलाफ करीब 12 प्राथमिकी दर्ज थीं। बाद में उसने रवि भुइयां, रीता बैगा, सूबेदार और नवल समेत अन्य लोगों के साथ सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण के समय उसे और अन्य सरेंडर करने वालों को नई जिंदगी शुरू करने तथा समाज की मुख्यधारा में लौटने का भरोसा दिया गया था। इसी उम्मीद में उसने संगठन का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने का फैसला किया।
अब कार्यालयों के चक्कर लगाने की शिकायत
मनदीप का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद जेल की सजा पूरी करने के बावजूद पुनर्वास योजना का लाभ उसे नहीं मिल सका। जमीन और घोषित इनाम की राशि के लिए वह लगातार प्रशासनिक कार्यालयों का चक्कर लगा रहा है।
उसने जिला प्रशासन से मामले की जांच कराकर नियमानुसार पुनर्वास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
IG ने कहा- पात्रता और प्रक्रिया की होगी जांच
मगध रेंज के आईजी विकास वैभव ने मामले के सामने आने की पुष्टि करते हुए कहा कि हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए पुनर्वास संबंधी प्रावधान हैं और पात्रता के अनुसार लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति को अब तक लाभ क्यों नहीं मिला। प्रक्रिया में किसी तरह की त्रुटि है तो उसकी समीक्षा की जाएगी। आईजी के अनुसार, डीएम, डीडीसी और एसपी की कमेटी के माध्यम से ऐसे मामलों को सरकार के समक्ष भेजा जाता है। पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि पुनर्वास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला।
अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासनिक जांच के बाद मनदीप के दावे पर क्या कार्रवाई होती है और क्या उसे पुनर्वास योजना के तहत जमीन तथा घोषित राशि का लाभ मिल पाता है।
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