पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। नामांकन के अगले ही दिन पार्टी को अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा, जिस पर अब विपक्ष हमलावर हो गया है। RJD नेता रोहिणी आचार्य ने BJP पर तीखा तंज कसते हुए कहा— “जो पार्टी तीन दिन पहले तक अपना दूल्हा तय नहीं कर पा रही, वो क्षेत्र का भविष्य क्या तय करेगी?”
दरअसल, बीजेपी ने पहले अभिषेक सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन नामांकन के तुरंत बाद ही उन्होंने पर्चा वापस ले लिया। पार्टी ने उनकी जगह नीरज सिन्हा को मैदान में उतार दिया। इस अचानक बदलाव ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।
‘रणनीति नहीं, डर का सबूत’
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर हमला बोलते हुए कहा कि आखिरी वक्त में उम्मीदवार बदलना बीजेपी की रणनीति नहीं, बल्कि हार के डर का साफ संकेत है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पार्टी को 72 घंटे के भीतर फैसला बदलना पड़ा?
नामांकन में गड़बड़ी बनी वजह?
सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक सिन्हा के नामांकन पत्र में दी गई पारिवारिक और शैक्षणिक जानकारी में गड़बड़ियां सामने आई थीं। आशंका जताई जा रही थी कि उनका नामांकन रद्द हो सकता है, जिससे बचने के लिए बीजेपी ने जल्दबाजी में उम्मीदवार बदल दिया।
हालांकि अभिषेक ने आधिकारिक तौर पर “पारिवारिक कारणों” का हवाला देकर नाम वापसी की बात कही है, लेकिन विपक्ष इस दावे को मानने को तैयार नहीं है।
विपक्ष का हमला तेज
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि “अब तक लोग बीजेपी के डर से भागते थे, लेकिन पहली बार बीजेपी का उम्मीदवार ही मैदान छोड़कर भाग गया।”
वहीं कांग्रेस और RJD नेताओं ने इसे बीजेपी की अंदरूनी गड़बड़ी और हार के डर से जोड़ते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट चुका है।
30 जुलाई को वोटिंग, 3 अगस्त को नतीजे
बांकीपुर सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है, जबकि 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए जाएंगे। ऐसे में उम्मीदवार बदलने की इस घटना ने चुनावी मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प और विवादित बना दिया है।
अब सवाल यही है—क्या यह सिर्फ ‘पारिवारिक कारण’ है या फिर चुनाव से पहले BJP की रणनीतिक हार?
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ब्यूरो हेड महुआ न्यूज़
बिहार /झारखण्ड