उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में टूट के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। पटना स्थित उनके आवास पर आयोजित लिट्टी–चोखा भोज में पार्टी के तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह शामिल नहीं हुए। भोज में जाने के बजाय तीनों विधायक बीजेपी के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मिलने उनके आवास पहुंचे, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
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सूत्रों के अनुसार RLM के कई नेता पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं और जल्द ही भाजपा या जदयू में शामिल हो सकते हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी की सबसे बड़ी वजह परिवारवाद को माना जा रहा है। मधुबनी से विधायक माधव आनंद मंत्री पद की रेस में थे, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया। इसके बाद से ही उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। हालांकि डैमेज कंट्रोल के तहत उन्हें विधायक दल का नेता बनाया गया, लेकिन असंतोष कम नहीं हुआ।
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बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए बिना नाम लिए पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा था। इस मामले पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक संदेश है, सुधार नहीं हुआ तो आगे निर्णय लिया जाएगा। उनका कहना था कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के दम पर चलती है, लेकिन जब अवसर देने की बारी आती है तो केवल परिवार को आगे बढ़ाया जाता है।
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इस बीच RLM के संस्थापक सदस्य और व्यावसायिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनंत कुमार समेत पूरे व्यावसायिक प्रकोष्ठ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अनंत कुमार ने कहा कि पार्टी अपने उद्देश्य और विचारधारा से भटक गई है, इसलिए स्वाभिमान के साथ समझौता कर पार्टी में रहना संभव नहीं था। उन्होंने जल्द ही जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता लेने की घोषणा की है।
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पार्टी में बढ़ती बगावत को रोकने के लिए 30 नवंबर को उपेंद्र कुशवाहा ने RLM की प्रदेश इकाई, सभी जिला इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग कर दिया था। इसके साथ ही पार्टी संचालन के लिए पांच सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया था। इसके बावजूद असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेटे को मंत्री बनाए जाने का फैसला ही पार्टी में टूट की सबसे बड़ी वजह बना है। दीपक प्रकाश फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और मंत्री बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना होगा। कुल मिलाकर राष्ट्रीय लोक मोर्चा इस समय गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है और आने वाले दिनों में पार्टी में और टूट देखने को मिल सकती है।






