बेतिया से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत की। बड़ा रमना मैदान में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी डॉक्टरों को अब निजी प्रैक्टिस की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए सरकार नई नीति लाने जा रही है, जिससे सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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करीब 34 मिनट के भाषण में मुख्यमंत्री ने 2005 से पहले और बाद के बिहार की तुलना करते हुए कहा कि पहले न तो कानून-व्यवस्था ठीक थी और न ही बुनियादी सुविधाएं। उनकी सरकार ने सड़कों, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि आज राज्य में कानून का राज है और विकास कार्य लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने बेतिया जिले के लिए 182 करोड़ रुपये की 161 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने दावा किया कि अब तक 10 लाख नौकरियां दी जा चुकी हैं और अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। महिलाओं के लिए आरक्षण, जीविका योजना और सामाजिक सौहार्द से जुड़े कार्यों को भी उन्होंने अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
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समृद्धि यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। विरोध की आशंका के चलते चंपारण में माले के युवा नेता फरहान राजा की गिरफ्तारी भी हुई, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए। कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री मौजूद रहे, हालांकि कुमारबाग में एक कार्यक्रम के दौरान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को पैदल ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समृद्धि यात्रा का उद्देश्य जमीनी हकीकत से रूबरू होना और योजनाओं की समीक्षा करना है। यह यात्रा आठ दिनों में नौ जिलों से होकर गुजरेगी।