लखीसराय में अशोक धाम महोत्सव का मंच इस बार सिर्फ भक्ति और परंपरा का गवाह नहीं बना, बल्कि एक ऐसे प्रशासनिक घटनाक्रम का केंद्र भी बन गया, जिसने पूरे जिले में सियासी हलचल तेज कर दी।

मंच पर वैदिक मंत्र गूंज रहे थे, दीप प्रज्वलन हो रहा था, और उसी समय जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र के तबादले का आदेश पटना से जारी हो गया। एक तरह से कहें तो डीएम समारोह में मौजूद थे, लेकिन कुर्सी उनसे “ऑन पेपर” छिन चुकी थी।

इस कार्यक्रम में विजय कुमार सिन्हा भी मौजूद थे और रुद्राभिषेक में शामिल होकर प्रदेश की समृद्धि की कामना कर रहे थे। लेकिन इसी बीच प्रशासनिक गलियारों से आई खबर ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया।

सरकार के आदेश में मिथिलेश मिश्र को तत्काल प्रभाव से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग, पटना में योगदान देने को कहा गया। साथ ही, जिले की कमान फिलहाल अपर समाहर्ता को सौंप दी गई।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक चल रहे सरकारी-धार्मिक कार्यक्रम के बीच ही यह बड़ा फैसला लेना पड़ा? सूत्र बताते हैं कि हाल में धान अधिप्राप्ति को लेकर गड़बड़ियों की शिकायतें सरकार तक पहुंची थीं। इसके अलावा कुछ विवादित संपर्कों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी चर्चाएं गर्म थीं।

हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरीके से यह तबादला हुआ, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया थी, या फिर किसी बड़े दबाव और जांच का नतीजा? इधर, महोत्सव में शामिल लोगों के बीच भी यही चर्चा रही कि “मंच पर डीएम और आदेश पटना से”—यह संयोग था या संदेश?

फिलहाल लखीसराय में प्रशासनिक हलचल तेज है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इस अचानक फैसले के पीछे की असली कहानी क्या है।
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