गया: केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतनराम मांझी एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। गया जिले के अतरी प्रखंड में महादलित समुदाय के बीच कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शराबबंदी को लेकर विवादित टिप्पणी की। मांझी ने कहा कि “अगर शराब सही तरीके से पी जाए तो उन्नति होती है। बड़े लोग भी पीते हैं। रात 10 बजे के बाद मर्द-औरत सब पीते हैं, तब उन्हें प्रतिष्ठित माना जाता है।”
मांझी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी के बीच उनके इस बयान को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच मांझी के बयान की चर्चा होती रही।
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हालांकि, अपने भाषण के दौरान मांझी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एनडीए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता समाज के वंचित और महादलित वर्गों का उत्थान है। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता दशरथ मांझी को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित करने की मांग एक बार फिर दोहराई। मांझी ने कहा कि जब तक दशरथ मांझी को देश का सर्वोच्च सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक वे यह मांग उठाते रहेंगे।
कंबल वितरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। मांझी ने ठंड के मौसम में जरूरतमंदों की सहायता को सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे। हालांकि, शराब को लेकर दिए गए बयान ने पूरे कार्यक्रम का फोकस बदल दिया और यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।






