रोहतास: बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में शुक्रवार को ऐसा झटका लगा, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। रोहतास जिला जज-4 अनिल कुमार की अदालत ने जिलाधिकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया। अदालत की सख्त टिप्पणी ने पूरे प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा दी।
अदालत ने साफ कहा कि जिलाधिकारी न्यायालय के आदेशों का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं और यह व्यवहार अदालत के साथ “हाइड एंड सीक” यानी लुका-छिपी खेलने जैसा है। जज ने कहा कि पर्याप्त समय और अवसर देने के बावजूद आदेशों का पालन नहीं हुआ, इसलिए अब नरमी की कोई गुंजाइश नहीं बची।
यह मामला एक वाहन दुर्घटना क्लेम से जुड़ा है, जिसकी जड़ें वर्ष 2003 तक जाती हैं। कोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित को भुगतान करने का आदेश दिया था और बाद में राशि की वसूली के लिए जिलाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन करीब दो दशकों तक फाइलें घूमती रहीं, आदेश कागजों में दबे रहे और कार्रवाई शून्य रही।
23 दिसंबर 2025 को अदालत ने DM पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था, लेकिन वह भी जमा नहीं किया गया। इससे नाराज होकर कोर्ट ने अब सीधा और कड़ा कदम उठाया है—DM कार्यालय की संपत्ति की कुर्की।
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अदालत ने नगर थाना अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि कुर्की की कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस बल मुहैया कराया जाए और पूरी प्रक्रिया जल्द पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जाए।
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इस आदेश के बाद रोहतास में चर्चा का बाजार गर्म है। यह फैसला सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक शक्ति का बड़ा संदेश माना जा रहा है—कि कानून के आगे कुर्सी और पद भी बौने हैं।