छपरा: डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को हादसे का शिकार बनाने की कथित साजिश मामले में जांच तेज हो गई है। छपरा-बलिया रेलखंड पर रेलवे ट्रैक के बीच पानी की टंकी रखे जाने के मामले में आरपीएफ, जीआरपी, स्थानीय पुलिस और एफएसएल की टीम ने घटनास्थल पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं।
रविवार को रिविलगंज थाना क्षेत्र में एफएसएल की टीम ने रेलवे ट्रैक और आसपास के इलाके की जांच की। टीम ने मौके से कई नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है।
छत से उतारकर ट्रैक पर रखी गई थी टंकी!
जांच के दौरान पुलिस की नजर विजय राय के टोला स्थित उस मकान पर भी गई, जहां रखी सिंटेक्स पानी की टंकी को ट्रैक तक लाए जाने की आशंका जताई जा रही है। एफएसएल टीम ने मकान की छत और आसपास के हिस्सों की भी गहन जांच की।
संदिग्धों की तलाश में छापेमारी तेज
सारण एसएसपी विनीत कुमार ने रिविलगंज थानाध्यक्ष को मामले की गंभीरता से जांच करने का निर्देश दिया है। वहीं रेल एसपी वीणा कुमारी के नेतृत्व में रेल सुरक्षा एजेंसियां भी अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
लोको पायलट की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
घटना शुक्रवार और शनिवार की रात की बताई जा रही है। डिब्रूगढ़ से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस गौतमस्थान रेलवे स्टेशन के पश्चिमी ढाला के पास पहुंची, तभी ट्रैक पर रखी पानी की टंकी से ट्रेन टकरा गई।
टक्कर के बाद टंकी इंजन के अगले हिस्से में फंस गई, लेकिन लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक लिया। उनकी सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया और सैकड़ों यात्रियों की जान बच गई।
दो थानों में दर्ज हुई एफआईआर
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अज्ञात लोगों ने एक मकान की छत से नीले रंग की सिंटेक्स टंकी उतारकर रेलवे ट्रैक पर रखी थी। इस मामले में छपरा जीआरपी और रिविलगंज थाना में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस घटना के पीछे कितने लोग शामिल थे और उनका असली मकसद क्या था।
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