पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। गुरुवार को पटना समेत चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। पटना स्थित फ्लैट से 3.20 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई है। निगरानी की टीमें अलग-अलग स्थानों पर संपत्ति और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, चंद्रशेखर सिंह पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। इसी मामले में पटना, छपरा, कटिहार और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित ठिकानों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, छापेमारी पूरी होने और जांच के निष्कर्ष सामने आने तक आरोपों की पुष्टि नहीं मानी जा सकती।
पटना के अपार्टमेंट में पहुंची निगरानी टीम
पटना में रूपसपुर थाना क्षेत्र के लोहिया पथ स्थित सरयुग वामिका अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 103 में निगरानी की टीम ने छापेमारी की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टीम दोपहर करीब 12:30 बजे फ्लैट पर पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान चंद्रशेखर सिंह वहां मौजूद नहीं थे।
छापेमारी के दौरान फ्लैट से 3.20 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई है। टीम अन्य संभावित दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।
छपरा कार्यालय में भी जांच
चंद्रशेखर सिंह की पोस्टिंग छपरा में बताई गई है। निगरानी की टीम ने छपरा शहर के राजेंद्र सरोवर स्थित उनके कार्यालय में भी जांच शुरू की। टीम का उद्देश्य आय, संपत्ति और उपलब्ध दस्तावेजों से जुड़े तथ्यों का सत्यापन करना है।
कटिहार के पैतृक आवास पर भी कार्रवाई
कटिहार में सहायक थाना क्षेत्र के लोहिया नगर स्थित चंद्रशेखर सिंह के पैतृक आवास पर भी निगरानी टीम पहुंची। जानकारी के अनुसार, टीम दो गाड़ियों से वहां पहुंची और आलीशान भवन में तलाशी शुरू की। कार्रवाई का नेतृत्व निगरानी डीएसपी कर रहे हैं। जांच में शामिल अधिकारी फिलहाल मीडिया के सामने विस्तृत जानकारी देने से बच रहे हैं।
सिलीगुड़ी में भी खंगाले जा रहे ठिकाने
पटना, छपरा और कटिहार के साथ पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में भी निगरानी की कार्रवाई चल रही है। चारों स्थानों पर एक साथ जांच का मकसद कथित आय से अधिक संपत्ति से संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों का पता लगाना है।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी तस्वीर
फिलहाल, पटना स्थित फ्लैट से नकदी मिलने के अलावा अन्य ठिकानों पर बरामदगी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। निगरानी ब्यूरो की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि किन-किन संपत्तियों और दस्तावेजों की पहचान हुई है तथा मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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