पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अब ‘ऑन-कैमरा’ होने वाली है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। अब अस्पतालों में लापरवाही बरतना आसान नहीं होगा, क्योंकि खुद मंत्री जी कंट्रोल रूम से व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे।
हाईवे पर ‘संजिवनी’ का इंतज़ार खत्म
सड़क हादसों में ‘गोल्डन ऑवर’ की अहमियत समझते हुए, सरकार ने नेशनल और स्टेट हाईवे पर 100 नई एंबुलेंस तैनात करने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं, हादसों के बाद घायलों को तुरंत इलाज मिले, इसके लिए 11 लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर और 5 लेवल-3 अस्पताल विकसित किए जा रहे हैं।
अब अस्पताल होंगे ‘CCTV’ की निगरानी में
सरकारी अस्पतालों की बदहाली और मनमानी अब नहीं चलेगी। मंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से CCTV कैमरे लगेंगे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मंत्री खुद भी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेंगे और कंट्रोल रूम से व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखेंगे। किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई तय है।
504 दवाओं का लक्ष्य और ‘क्वालिटी’ पर ज़ोर
फिलहाल सरकारी अस्पतालों में 350 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन विभाग का लक्ष्य 504 तरह की दवाएं पहुंचाने का है। साथ ही, दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों को सचेत किया है—बाजार से दवाओं के नमूने लेकर उनकी नियमित जांच अनिवार्य होगी।
जनता से अपील: ‘आपकी शिकायत, त्वरित कार्रवाई’
मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि आपके नजदीकी अस्पताल में कोई मशीन खराब है या दवा उपलब्ध नहीं है, तो चुप न बैठें। इसकी सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को दें ताकि बिना किसी देरी के समस्या का समाधान हो सके।
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