पटना के पाटलिपुत्र खेल परिसर में सोमवार को हौसले और जुनून की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली, जब अंतरराष्ट्रीय पैरा निशानेबाज संजीव कुमार गिरि अपनी ‘हौसलों की राइड’ यात्रा के दौरान यहां पहुंचे।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण ने अंगवस्त्र और बोधि वृक्ष के प्रतीक चिह्न देकर उनका सम्मान किया और उनके अदम्य साहस की सराहना की।
संजीव कुमार गिरि, जो पेशे से लेखा परीक्षक हैं और चेन्नई में भारतीय सांख्यिकी एवं लेखा विभाग में कार्यरत हैं, खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। अब तक वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेढ़ दर्जन से अधिक पदक अपने नाम कर चुके हैं।
उनकी ‘हौसलों की राइड’ केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक जन-जागरण अभियान है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वास्थ्य, फिटनेस और खेल के प्रति जागरूक करना है। नई दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा चार राज्यों और लगभग 3000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बिहार पहुंची है।
इस अवसर पर संजीव ने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों के बीच अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि असली सीमाएं शरीर में नहीं, बल्कि हमारी सोच में होती हैं। यदि इरादे मजबूत हों, तो हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। साथ ही पैरा खेलों को व्यापक पहचान दिलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह कार्यक्रम केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उपस्थित खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। संजीव की कहानी ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के बल पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।
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