Bihar News : अंधकार कोई शाप नहीं, वही सृष्टि का द्वार है… अशोकधाम में गूंजा पूज्य बापू का संदेश!
लखीसराय स्थित पावन धाम अशोकधाम की पुण्यभूमि पर स्वानतः सुखाय आयोजित नौ दिवसीय “मानस श्रृंगी ऋषि कथा” के तृतीय दिवस का आयोजन अत्यंत आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कथा की शुरुआत परम पूज्य बापू ने लोक कल्याणार्थ वैदिक मंत्र “श्रवणात, ममनात, ध्यानात, तात्पर्येण, निरंतरम्, बुद्धेहि सूक्ष्मवतं, आयाति ततो वस्तु फलभ्यते” के सामूहिक पाठ से कराई। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने एकस्वर में मंत्रोच्चार कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

व्यासपीठ से पूज्य बापू ने प्रतिदिन की भांति कहा कि यह भूमि अनेक प्रकार की चेतनाओं से परिपूर्ण है और इस पावन धरा पर आयोजित नौ दिवसीय कथा का केंद्र बिंदु मानस श्रृंगी ऋषि हैं। उन्होंने प्रकट-अप्रकट सभी चेतनाओं को नमन करते हुए व्यासपीठ से विद्वतजनों, विभिन्न क्षेत्रों से आए महानुभावों, मनोरथी परिवारों तथा उपस्थित समस्त श्रोता भाई-बहनों को प्रणाम किया।

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कथा के क्रम में पूज्य बापू ने द्वितीय दिवस की संध्या में भक्तों के साथ बिताए गए अनौपचारिक क्षणों को स्मरण करते हुए कबीर के दोहों के प्रति अपने अगाध प्रेम की चर्चा की। उन्होंने एक भक्त की चिट्ठी पढ़ी, जिसमें 15 वर्षों से कथा सुनने के बावजूद उसके फल को लेकर प्रश्न किया गया था। इस पर पूज्य बापू ने “जो दायक फल चारि” का उल्लेख करते हुए कहा कि कथा सुनने से समाज में धार्मिक पहचान बनती है, जीवन का अर्थ समझ में आता है, कामनाएं या तो पूर्ण हो जाती हैं या स्वतः शून्य हो जाती हैं और अंततः कथा मनुष्य को मुक्ति की ओर ले जाती है।

सुख-दुख के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूज्य बापू ने अंधकार और प्रकाश की सुंदर उपमा दी। उन्होंने कहा कि संसार की अधिकांश महान घटनाएं अंधकार से जन्म लेती हैं। जीवन में यदि दुख रूपी अंधकार है तो व्यथित होने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि उसी अंधकार के बाद प्रकाश का आगमन निश्चित है। गर्भ के अंधकार से नवजात शिशु का जन्म और भगवान श्रीकृष्ण का अंधेरी कारागार में अवतार इसी शाश्वत सत्य को प्रमाणित करता है। कथा ने श्रद्धालुओं को धैर्य, विश्वास और आत्मचिंतन का संदेश दिया।

कृष्णदेव प्रसाद यादव, लखीसराय.






