बिहार की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने व्यवहार को लेकर विवादों में घिर गए हैं। नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने की घटना सामने आने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे महिला सम्मान और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए मुख्यमंत्री से माफी और इस्तीफे तक की मांग कर दी है।
घटना सोमवार की बताई जा रही है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंप रहे थे। इसी दौरान एक महिला डॉक्टर नुसरत को नियुक्ति पत्र देने के बाद मुख्यमंत्री ने उनके हिजाब की ओर इशारा करते हुए सवाल किया और फिर अपने हाथ से हिजाब हटा दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया।
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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक मंच पर महिला का हिजाब हटाना बेहद शर्मनाक है और यह या तो बुढ़ापे का असर है या फिर मुसलमानों का अपमान। उन्होंने मुख्यमंत्री से पद छोड़ने तक की बात कह दी।
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कांग्रेस और राजद ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब राज्य का मुखिया इस तरह का आचरण करेगा, तो महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की उम्मीद कैसे की जा सकती है। वहीं राजद ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के अपमान से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है। AIMIM ने भी इस घटना को अस्वीकार्य बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।
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हालांकि, कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री का बचाव भी किया है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार का व्यवहार पिता-समान था और इसमें दुर्भावना नहीं थी, हालांकि हिजाब हटाना उचित नहीं माना जा सकता। बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने भी कहा कि मुख्यमंत्री सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और इस घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
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इस विवाद के बीच मंगलवार को बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के इंजीनियरों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण रोक दिया गया और मीडिया की एंट्री भी सीमित कर दी गई। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।






