लखीसराय: किऊल नदी का जलस्तर घटते ही लखीसराय और किऊल के बीच आवागमन बहाल करने की कवायद तेज हो गई है। मंगलवार से नदी में अस्थायी रास्ता और पुलिया बनाने का काम शुरू कर दिया गया। निर्माण कार्य के लिए नदी में जेसीबी और ट्रैक्टर उतारे गए हैं। लोगों को उम्मीद है कि अगले दो से तीन दिनों में नदी के रास्ते आवागमन शुरू हो सकेगा।
फिलहाल नदी में करीब 500 मीटर लंबा कच्चा रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसके बाद नदी की धारा को नियंत्रित कर करीब 25 मीटर लंबी अस्थायी पुलिया बनाने की योजना है। निर्माण कार्य में जुटे लोग जल्द से जल्द रास्ता चालू करने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं।
छह महीने तक झेलनी पड़ती है आवागमन की परेशानी
किऊल और लखीसराय के बीच किऊल नदी लंबे समय से लोगों के लिए आवागमन की बड़ी समस्या बनी हुई है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर बरसात के दौरान पांच से छह महीने तक यह रास्ता बंद हो जाता है। ऐसे में लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है।
किऊल से लखीसराय की दूरी करीब एक किलोमीटर है, लेकिन बीच में नदी होने और स्थायी सड़क पुल नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी पर स्थायी पुल बनने से क्षेत्र की बड़ी आबादी को राहत मिलेगी। फिलहाल कई लोग आवागमन के लिए रेलवे पुल का सहारा लेते हैं।
खगौर-वृंदावन के लोगों की पहल लाई रंग
नदी में रास्ता बनाने की पहल स्थानीय लोगों के प्रयास से आगे बढ़ी है। जानकारी के अनुसार, किऊल रेल प्रशासन के साथ शैलेन्द्र कुमार यादव और गब्बर सिंह ने इस दिशा में पहल की। इसके बाद खगौर और वृंदावन के अन्य लोग भी इस अभियान से जुड़ गए।
रविवार को नदी का रास्ता चालू करने को लेकर आम सहमति बनी थी। इसके अगले दिन से निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। काम की देखरेख में पूर्व विधायक प्रह्लाद यादव, खगौर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि एवं पूर्व मुखिया मुहम्मद इरफान, समाजसेवी मुन्ना यादव, पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि नृपेंद्र कुमार, रंजीत कुमार, पप्पू यादव समेत अन्य लोग जुटे हैं।
तेज धारा बनी चुनौती, 22 अक्टूबर तक पुलिया बनाने की उम्मीद
नदी में पहले से बनी अस्थायी पुलिया बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हो जाती है। फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से के पास पानी की धारा तेज है, जिससे निर्माण कार्य में चुनौती आ रही है। इसके बावजूद काम में जुटे लोग पानी की धारा को नियंत्रित करने की व्यवस्था कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर 22 अक्टूबर तक अस्थायी पुलिया तैयार करने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, रास्ता कब तक चालू होगा, यह निर्माण की प्रगति और नदी की स्थिति पर निर्भर करेगा।
रोजाना हजारों लोगों को होगा फायदा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, किऊल नदी के रास्ते से प्रतिदिन करीब 20 से 25 हजार लोग आवागमन करते हैं। अस्थायी रास्ता चालू होने से दोपहिया और चारपहिया वाहनों के आने-जाने में सुविधा होगी और किऊल-लखीसराय के बीच की दूरी तय करना आसान होगा।
लोगों ने स्थानीय पहल की सराहना की है। साथ ही, क्षेत्र में स्थायी सड़क पुल बनाने की मांग भी उठ रही है। लोगों का मानना है कि स्थायी पुल बनने से हर साल बरसात में पैदा होने वाली आवागमन की समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सकता है।
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