रामगढ़ (झारखण्ड): पेट में गहरी भूख, सिर पर कर्ज का भारी बोझ और आंखों में दो अनाथ बच्चों को एक बेहतर भविष्य देने का सपना—गरीबी की इसी आग में तपकर एक मां जब मैदान में उतरी, तो उसने मुश्किलों को ही अपना हथियार बना लिया।
झारखंड के रामगढ़ जिले में आयोजित होमगार्ड बहाली की शारीरिक परीक्षा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने गरीबी के दर्द और एक महिला की अटूट हिम्मत को पूरे देश के सामने लाकर रख दिया है। ईंट-भट्ठे में दिन-रात हाड़-तोड़ मजदूरी करने वाली कविता महतो ने बिना किसी स्पोर्ट्स किट, जूते या ट्रैक सूट के, सिर्फ एक साधारण सी साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी की।
खाली पेट और कर्ज के बोझ तले दौड़ती एक मां का हौसला
कविता के सिर से पति का साया उठ चुका है। परिवार पर भारी कर्ज है और दो छोटे बच्चों समेत बुजुर्ग सास-ससुर के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी कविता के कमजोर कंधों पर है। ईंट-भट्ठे की मामूली मजदूरी से परिवार का पेट पालना नामुमकिन हो रहा था, इसलिए उन्होंने होमगार्ड भर्ती परीक्षा में किस्मत आजमाने का फैसला किया।
ट्रायल के दिन कविता के पास ना तो जूते खरीदने के पैसे थे और ना ही स्पोर्ट्स ड्रेस। यही नहीं, घर में अनाज न होने के कारण वह भूखे पेट ही दौड़ लगाने मैदान में पहुंच गईं। लेकिन गरीबी की यह तंगी उनके हौसले को नहीं तोड़ पाई। जब सीटी बजी, तो साड़ी के पल्लू को संभालते हुए और नंगे पैरों से तपती जमीन को नापते हुए कविता इतनी तेजी से भागीं कि ट्रैक पर मौजूद कई प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया।
साड़ी में दौड़ते देख गूंज उठा मैदान
दौड़ पूरी करते ही पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कविता का यह जज्बा देख हर कोई भावुक हो गया। गया जिले के इमामगंज से विधायक दीपा कुमारी ने भी कविता के इस संघर्ष को सलाम करते हुए कहा, “आज की पीढ़ी जो सुविधाओं की कमी या छोटी-मोटी दिक्कतों का बहाना बनाती है, उनके लिए कविता एक जीती-जागती मिसाल हैं। गरीबी और तंगी के बीच साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ना यह साबित करता है कि सपनों को पूरा करने के लिए केवल जिजीविषा और जुनून की जरूरत होती है।”
गरीबी मिटाने का सपना: 284 पदों पर होनी है बहाली
रामगढ़ में होमगार्ड के कुल 284 पदों के लिए बहाली प्रक्रिया चल रही है, जिसमें महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत और विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत का विशेष आरक्षण प्रावधान है। कविता को उम्मीद है कि इस नौकरी के मिलने से उनके परिवार का यह गरीबी रूपी अभिशाप मिट जाएगा और उनके बच्चों को दो वक्त की रोटी नसीब हो सकेगी।