हजारीबाग: जिले में करोड़ों रुपये की जमीन हेराफेरी के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। निचली अदालत ने सरकारी दस्तावेजों से कथित छेड़छाड़ के मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। बताया जा रहा है कि मामला 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की जमीन से जुड़ा है।
यह पूरा मामला हजारीबाग के सारले मौजा स्थित खाता संख्या 93 की करीब 9 एकड़ सरकारी जमीन और खाता संख्या 118 की लगभग 12 एकड़ रैती सेटलमेंट भूमि से संबंधित है।
मामले के आवेदनकर्ता और पावर ऑफ अटॉर्नी धारक राजेश मिश्रा का आरोप है कि रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखे गए जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों के साथ सुनियोजित तरीके से छेड़छाड़ की गई। उनका दावा है कि दस्तावेजों में बदलाव कर करोड़ों रुपये की जमीन के रिकॉर्ड को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
राजेश मिश्रा ने मांग की है कि संबंधित सरकारी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जाए, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
6 साल की कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत
आवेदनकर्ता राजेश मिश्रा के अनुसार, इस कार्रवाई के लिए उन्हें करीब 6 साल से अधिक समय तक संघर्ष करना पड़ा। जिला प्रशासन और पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार जताया है।
वहीं, रांची से आए अधिवक्ता प्रत्यूष शौनिक्य ने कहा कि अदालत का यह फैसला महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि आवेदनकर्ता पिछले कई वर्षों से इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस जांच में इस मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
अब FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच शुरू करेगी। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता, रिकॉर्ड में हुए बदलाव और इस पूरे मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। फिलहाल सभी की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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