पटना स्थित होटल मौर्य में आयोजित राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी (कार्यवाहक) अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह प्रस्ताव वरिष्ठ नेता भोला यादव ने रखा, जिस पर कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मुहर लगाई। बैठक में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती, संजय यादव समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और 27 राज्यों से आए प्रदेश अध्यक्ष मौजूद रहे।
कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में संगठन को मजबूत करने और भविष्य की लड़ाई के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को बीते चुनाव की हार को भूलकर आगे बढ़ना होगा। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि या तो भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने झुका जाए या फिर उनसे वैचारिक लड़ाई लड़ी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजद किसी भी कीमत पर समझौते की राजनीति नहीं करेगी।
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राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी की नियुक्ति पर खुशी जताते हुए कहा कि पद पर न रहते हुए भी तेजस्वी ने पार्टी के लिए बेहतर काम किया है और अब नई जिम्मेदारी के साथ वे संगठन को और मजबूती देंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर आगामी चुनावों की तैयारी में जुटने की अपील की।
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हालांकि, तेजस्वी के कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर परिवार के भीतर से ही सियासी तंज भी सामने आया। उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार लोगों को सवालों का सामना करना चाहिए और जवाबदेही से बचना नहीं चाहिए। उनके इस बयान ने राजद की आंतरिक राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कार्यकारी अध्यक्ष बनने के साथ ही तेजस्वी यादव को पार्टी में लगभग राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी शक्तियां मिल गई हैं। लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के संकेतों के बीच यह फैसला राजद में नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।