शेखपुरा के कटरा चौक स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय सेवा केंद्र में इस बार होली कुछ अलग अंदाज़ में मनाई गई। रंगों की जगह फूलों की खुशबू, डीजे की जगह आध्यात्मिक गीत और हुड़दंग की जगह प्रेम-शांति का संदेश—यही इस ‘अलौकिक होली स्नेह मिलन समारोह’ की खास पहचान रही।
कार्यक्रम की शुरुआत आध्यात्मिक संदेश के साथ हुई। सेवा केंद्र संचालिका अनु बहन ने फागुन पूर्णिमा और होलिका दहन के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “होलिका दहन केवल लकड़ियां जलाने का प्रतीक नहीं, बल्कि मन के भीतर जमी कटु स्मृतियों, क्रोध और नकारात्मक भावनाओं को समाप्त करने का संदेश है। होली हमें सिखाती है कि पुराने दुखों को त्यागकर नए उत्साह और सकारात्मक सोच के साथ जीवन की नई शुरुआत करें।”

National News : बरसाना में लट्ठमार होली: सखियों के लट्ठ, हुरियारों की ढाल और प्रेम की परंपरा!
उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज में तनाव और विभाजन की स्थिति दिखाई देती है, ऐसे में होली का पर्व हमें प्रेम, सद्भाव और नैतिक मूल्यों की ओर लौटने की प्रेरणा देता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में शांति, सहनशीलता और आत्मिक जागरूकता को अपनाएं।
Bihar News : ‘हाथी बनाम बंदर’ विधानसभा से सोशल मीडिया तक, शब्दों की जंग तेज!
समारोह का सांस्कृतिक भाग भी आकर्षण का केंद्र रहा। कुमारी परी ने ‘वृंदावन में उड़े रे गुलाल’ गीत पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं कुमारी शिवानी ने ‘राधा संग होली नंदलाल खेलते’ गीत पर नृत्य कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। दोनों प्रस्तुतियों में पारंपरिक परिधान और भावभंगिमा ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया।

इस अवसर पर फूलों और गुलाब जल से अलौकिक होली खेली गई। उपस्थित सभी भाई-बहनों और अतिथियों को गुलाल का तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य अतिथि, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरा परिसर आध्यात्मिक संगीत, हंसी-खुशी और आपसी स्नेह के रंग में सराबोर दिखा।
Bihar News : एक साथ 42 MLA को नोटिस… क्या डगमगाएगी कुर्सी?
समापन पर शांति पाठ के साथ सभी ने संकल्प लिया कि वे इस होली पर केवल बाहरी रंग ही नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और विचारों में भी प्रेम और सद्भाव का रंग भरेंगे। यह आयोजन सिर्फ एक पर्व का उत्सव नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश बनकर सामने आया।