पटना/मधुबनी: अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। लेकिन जापान के नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स के दौरान बिहार के पैरा तैराक मोहम्मद शम्स आलम शेख से जुड़ा एक विवाद सामने आया है। उन पर होटल की महिला कर्मचारी के साथ कथित छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद जापानी पुलिस ने शम्स आलम को हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें भारत वापस भेज दिया गया। इस मामले ने भारतीय खेल प्रतिनिधिमंडल के भीतर भी असहज स्थिति पैदा कर दी। अब भारतीय पैरालंपिक समिति (PCI) की ओर से उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई और आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने पर विचार किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, आरोपों को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष और आजीवन प्रतिबंध का फैसला अभी सामने नहीं आया है। इसलिए इस मामले में आरोप, संबंधित अधिकारियों के बयान और अंतिम रूप से साबित तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
होटल की महिला कर्मचारी से कथित छेड़छाड़ का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना उस होटल में हुई, जहां भारतीय पैरा तैराकी टीम ठहरी हुई थी। बताया गया है कि होटल की एक महिला कर्मचारी हाउसकीपिंग के लिए शम्स आलम के कमरे में पहुंची थीं।
आरोप है कि इसी दौरान खिलाड़ी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और अश्लील इशारे किए। महिला कर्मचारी ने कथित घटना के बाद अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद होटल प्रबंधन और स्थानीय आयोजन समिति के स्तर पर मामला भारतीय दल के अधिकारियों तक पहुंचा।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक महिला कर्मचारी की शिकायत और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका से जुड़े सवाल शामिल हैं।
जापानी पुलिस ने हिरासत में लिया, फिर भारत वापसी
मीडिया रिपोर्ट में भारतीय पैरालंपिक समिति के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि शिकायत के बाद जापानी पुलिस शम्स आलम को स्थानीय थाने ले गई थी। भारतीय दल के अधिकारी भी मामले की जानकारी लेने के लिए होटल और पुलिस थाने पहुंचे।
रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में स्थानीय आयोजन समिति ने हस्तक्षेप किया। भारतीय पक्ष से महिला कर्मचारी और होटल प्रबंधन को लिखित माफी देने तथा खिलाड़ी को जल्द भारत वापस भेजने की व्यवस्था करने को कहा गया।
इसके बाद शम्स आलम को दूसरे होटल में ठहराया गया और अगले दिन नागोया से भारत भेज दिया गया। संबंधित अधिकारी के बयान के अनुसार, लिखित माफी सौंपे जाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
हालांकि, भारत वापस भेजे जाने या माफी दिए जाने भर से आरोपों की सच्चाई अथवा कानूनी स्थिति अपने आप तय नहीं हो जाती। इस मामले में जापानी पुलिस की कार्रवाई और शिकायत की अंतिम स्थिति को लेकर स्वतंत्र आधिकारिक जानकारी सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
भारतीय दल को बीच प्रतियोगिता में देना पड़ा जवाब
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मामले के सामने आने के बाद भारतीय दल के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने खेल संबंधी काम छोड़कर कई घंटे होटल और पुलिस थाने में बिताने पड़े।
बताया गया कि होटल प्रबंधन और स्थानीय आयोजन समिति ने भारतीय अधिकारियों से पूछा कि संबंधित खिलाड़ी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के अनुसार, घटना से भारतीय प्रतिनिधिमंडल को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
अब सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल किसी खिलाड़ी के खिलाफ ऐसी शिकायत आने पर खेल संस्थाएं किस तरह की जांच और अनुशासनात्मक प्रक्रिया अपनाती हैं। निष्पक्ष कार्रवाई के लिए शिकायत की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी आवश्यक है।
क्या शम्स आलम पर लगेगा आजीवन प्रतिबंध?
इस मामले में सबसे बड़ी चर्चा संभावित आजीवन प्रतिबंध को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय पैरालंपिक समिति के स्तर पर शम्स आलम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की गई है और केंद्र सरकार को भी मामले की जानकारी दी गई है।
बताया गया है कि एशियन पैरा गेम्स के बाद संबंधित अधिकारियों की बैठक में मामले पर विचार किया जाना है। इसके बाद खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण को अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भेजे जाने की संभावना जताई गई है।
फिलहाल आजीवन प्रतिबंध अंतिम रूप से लागू होने की पुष्टि नहीं है। आगे की कार्रवाई संबंधित संस्थाओं की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
मधुबनी के गांव से अंतरराष्ट्रीय तैराकी तक का सफर
मोहम्मद शम्स आलम शेख बिहार के मधुबनी जिले के रथौस गांव के रहने वाले बताए गए हैं। उनकी खेल यात्रा भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी।
रिपोर्ट के मुताबिक, वह शुरुआती दौर में कराटे खेलते थे और ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके थे। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद एमबीए भी किया।
साल 2010 के आसपास उनकी रीढ़ के निचले हिस्से में ट्यूमर का पता चला। ऑपरेशन के बाद हुई मेडिकल जटिलताओं के कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। इसके बाद उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पुनर्वास के दौरान उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक राजाराम घाग से हुई। इसके बाद उन्होंने तैराकी को अपने जीवन का हिस्सा बनाया और 2012-13 के आसपास पेशेवर पैरा तैराकी की शुरुआत की।
पैरा तैराकी में हासिल कर चुके हैं उपलब्धियां
शम्स आलम के खेल करियर में कई उल्लेखनीय उपलब्धियों का जिक्र मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार, वह पुरुषों की 100 मीटर बटरफ्लाई S5 और 50 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक SB4 श्रेणियों में विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने पटना में गंगा नदी में 13 किलोमीटर की तैराकी पूरी करने का रिकॉर्ड भी बनाया था। उनकी यात्रा शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल में आगे बढ़ने की मिसाल के रूप में पेश की जाती रही है।
लेकिन खेल उपलब्धियां और किसी खिलाड़ी के खिलाफ सामने आए गंभीर आरोप दो अलग-अलग विषय हैं। किसी खिलाड़ी की पूर्व उपलब्धियां आरोपों की जांच का विकल्प नहीं हो सकतीं, और न ही केवल आरोप के आधार पर अंतिम दोष तय किया जा सकता है।
अब जांच और आधिकारिक फैसले पर टिकी नजरें
जापान में सामने आए इस मामले ने भारतीय पैरा खेल जगत और खेल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर महिला कर्मचारी की शिकायत को गंभीरता से लेना जरूरी है, तो दूसरी ओर किसी भी संभावित दंडात्मक फैसले का आधार निष्पक्ष जांच और लागू नियम होने चाहिए।
अब यह देखना अहम होगा कि भारतीय पैरालंपिक समिति इस मामले में क्या औपचारिक निर्णय लेती है, जापानी अधिकारियों की ओर से शिकायत और कार्रवाई की क्या स्थिति स्पष्ट होती है और क्या शम्स आलम पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाता है।
फिलहाल मामला गंभीर आरोपों और प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई के चरण में है। अंतिम फैसला आने तक आरोपों को साबित हुआ तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
ये खबर भी पढ़े: गया में दारोगा के दो बेटों पर ताबड़तोड़ फायरिंग, रानू सिंह की मौत; मोनू सिंह की हालत गंभीर!